2050 में दुनिया झेलेगी कोरोना से भी बड़ा कहर! लाखों बच्चे हो जाएंगे अनाथ? रिपोर्ट ने उड़ाई सबकी नींद
WHO Cancer Report: WHO की रिपोर्ट के मुताबिक 2050 तक दुनिया में कैंसर के नए मामले 67% बढ़कर 3.5 करोड़ हो सकते हैं। हर 5 में 1 व्यक्ति को कैंसर का खतरा, जबकि इसकी सामाजिक-आर्थिक मार 92% आबादी तक होगी।
- Written By: अर्पित शुक्ला
सांकेतितक तस्वीर (Image- Social Media)
Cancer Report 2050: कोरोना महामारी की भयावह यादें अभी भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। लेकिन अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की नई रिपोर्ट ने एक और बड़ी चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले वर्षों में कैंसर वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है और वर्ष 2050 तक इसके मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
WHO की 8 जुलाई को जारी रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2050 तक दुनिया में हर साल कैंसर के नए मामलों की संख्या बढ़कर 3.5 करोड़ तक पहुंच सकती है। यह मौजूदा स्तर की तुलना में लगभग 67 प्रतिशत अधिक होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर निम्न और मध्यम आय वाले देशों पर पड़ेगा, जहां मामलों में 133 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है।
हर पांच में से एक व्यक्ति को हो सकता है कैंसर
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति अपने जीवनकाल में कभी न कभी कैंसर से प्रभावित हो सकता है। वहीं, कैंसर का असर केवल मरीज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवार, देखभाल करने वालों और आर्थिक व्यवस्था पर भी पड़ेगा। इसी कारण WHO का अनुमान है कि किसी न किसी रूप में दुनिया की 92 प्रतिशत आबादी कैंसर के प्रभाव से जुड़ सकती है।
सम्बंधित ख़बरें
बातचीत होगी लेकिन… ईरान ने की अपील पर डोनाल्ड ट्रंप का दो टूक जवाब, बोले- खत्म हो चुका है सीजफायर
कौन हैं 32 साल के नीरज सिन्हा? जिन्हें BJP ने बांकीपुर से बनाया प्रत्याशी, अभिषेक की जगह लड़ेंगे चुनाव
न्यूजीलैंड में PM मोदी का हुआ भव्य स्वागत, खास रौशनी से जगमगाया मशहूर टावर, गदगद हुए प्रधानमंत्री
मैं मौत से नहीं डरती… शेख हसीना का बड़ा ऐलान, बोलीं- दिसंबर में लौट जाएंगी बांग्लादेश
2024 में सामने आए 2.06 करोड़ नए मामले
| श्रेणी | कैंसर का प्रकार | अनुमानित नए मामले (2024) |
|---|---|---|
| कुल वैश्विक आंकड़े | नए कैंसर मरीज | 2.06 करोड़+ |
| कुल वैश्विक आंकड़े | कैंसर से मौतें | 97 लाख |
| पुरुष | फेफड़ों का कैंसर | 16 लाख |
| पुरुष | प्रोस्टेट कैंसर | 15 लाख |
| महिलाएं | स्तन कैंसर | 24 लाख |
| महिलाएं | फेफड़ों का कैंसर | 10 लाख |
| महिलाएं | कोलोरेक्टल कैंसर | प्रमुख कैंसरों में शामिल |
| बच्चे | विभिन्न प्रकार के कैंसर | खतरा बढ़ रहा है |
रिपोर्ट में बताया गया है कि हर साल करीब 4 लाख बच्चे और किशोर (0-19 वर्ष) कैंसर की चपेट में आते हैं। इनमें अधिकांश मरीज निम्न और मध्यम आय वाले देशों से होते हैं, जहां समय पर जांच और इलाज की सुविधाएं सीमित हैं।
समय से पहले मौत का बड़ा कारण बन रहा कैंसर
2024 में कैंसर से हुई मौतों में 48 लाख से अधिक लोग 30 से 69 वर्ष आयु वर्ग के थे। WHO का कहना है कि कैंसर अब समय से पहले होने वाली मौतों का प्रमुख कारण बनता जा रहा है।
लाखों बच्चे हो रहे अनाथ
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 में कैंसर से हुई मौतों के कारण दुनिया भर में करीब 24.5 लाख बच्चे अनाथ हो गए। 10.4 लाख बच्चों ने अपनी मां को खोया। 14.1 लाख बच्चों ने अपने पिता को खो दिया। भारत, चीन, नाइजीरिया, इंडोनेशिया, इथियोपिया और पाकिस्तान जैसे देशों में ऐसे मामलों की संख्या सबसे अधिक रही।
मानसिक और आर्थिक संकट भी बढ़ा
WHO ने कहा कि कैंसर केवल शारीरिक बीमारी नहीं है, बल्कि इसका असर मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर भी पड़ता है। आधे से अधिक मरीज मानसिक तनाव, अवसाद और चिंता का सामना करते हैं। मरीजों की देखभाल करने वाले परिजन भी तनाव और सामाजिक अलगाव महसूस करते हैं। इलाज का भारी खर्च और आय में कमी कई परिवारों को आर्थिक संकट में धकेल देती है। WHO ने कैंसर को ‘मेडिकल दिवालियापन’ (Medical Bankruptcy) का प्रमुख कारण भी बताया है।
गरीब देशों में जांच और इलाज की भारी कमी
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी को अब भी पैथोलॉजी और मेडिकल इमेजिंग जैसी बुनियादी जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। सब-सहारा अफ्रीका में हर 10 लाख लोगों पर केवल एक पैथोलॉजिस्ट उपलब्ध है, जबकि उच्च आय वाले देशों में यह संख्या लगभग 50 गुना अधिक है।
अमीर और गरीब देशों में इलाज का बड़ा अंतर
रिपोर्ट बताती है कि विकसित देशों में समय पर जांच और बेहतर इलाज के कारण मरीजों के बचने की संभावना अधिक होती है। उच्च आय वाले देशों में स्तन कैंसर की 85 प्रतिशत मरीज पांच वर्ष तक जीवित रहती हैं। कम आय वाले देशों में यह आंकड़ा 45 प्रतिशत से भी कम है। बचपन के लिम्फोइड ल्यूकेमिया में भी यही अंतर देखने को मिलता है। यूरोप में जहां 93 प्रतिशत बच्चे इलाज के बाद बच जाते हैं, वहीं अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में यह दर केवल 19 प्रतिशत है।
यह भी पढ़ें- Ebola Crisis Congo: कांगो इबोला संकट से 600 मौतें, संयुक्त राष्ट्र ने दी भयानक प्रकोप की चेतावनी
WHO की चेतावनी
WHO ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कैंसर अब केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, आर्थिक सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता से जुड़ा वैश्विक मुद्दा बन चुका है। यदि रोकथाम, समय पर जांच और उपचार की सुविधाओं में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में कैंसर दुनिया में मौत का सबसे बड़ा कारण बन सकता है।
