DRC में इबोला का तांडव: 1500 से अधिक संक्रमित, सैकड़ों की मौत; अफ्रीका में गहराया स्वास्थ्य संकट

Ebola Outbreak DRC: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला वायरस का प्रकोप अनियंत्रित होता जा रहा है। 1,528 पुष्ट मामलों और 492 मौतों के साथ स्थिति गंभीर बनी हुई है।
Ebola's deadly rampage in DRC: Over 1,500 infected, hundreds dead; health crisis deepens in Africa
सांकेतिक फोटो, सो. AI
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Ebola Outbreak DRC Death Toll Africa: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) इस समय अपनी सदी के सबसे भीषण स्वास्थ्य संकटों में से एक का सामना कर रहा है। देश में इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जिसने अब तक सैकड़ों परिवारों को तबाह कर दिया है।

आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, देश में इबोला के 1,528 पुष्ट मामले सामने आए हैं, जिनमें से 492 लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा न केवल डराने वाला है, बल्कि यह दर्शाता है कि संक्रमण को रोकने के प्रयास जमीन पर बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

तेजी से बढ़ता कम्युनिटी ट्रांसमिशन

पब्लिक हेल्थ अधिकारियों द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में 628 पुष्ट मरीज आइसोलेशन या अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि 239 मरीज इस बीमारी से ठीक होकर घर लौट चुके हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय 'कम्युनिटी ट्रांसमिशन' है।

रिपोर्टों से पता चलता है कि महामारी के 25वें और 26वें सप्ताह में सबसे अधिक उछाल देखा गया, जहां हर हफ्ते 300 से अधिक नए मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा, करीब 185 संदिग्ध मामलों की पहचान की गई है, जिनकी जांच रिपोर्ट का इंतजार है।

मैदानी इलाकों में चुनौतियां

इबोला वॉयरस के खिलाफ इस जंग में स्वास्थ्य कर्मियों को कई मोर्चों पर जूझना पड़ रहा है। सबसे बड़ी बाधा प्रभावित समुदायों का विरोध है, जो विशेष रूप से पोस्टमार्टम के लिए नमूने लेने का विरोध कर रहे हैं। पूर्वी प्रांत नॉर्थ किवू में इबोला उपचार केंद्रों की क्षमता में भारी कमी देखी जा रही है।

इसके साथ ही, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में विफलता, लैब परिणामों में देरी और चिकित्सा उपकरणों की कमी ने स्थिति को और अधिक नाजुक बना दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के विशेषज्ञों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय सशस्त्र समूहों की गतिविधियों और असुरक्षा के कारण संक्रमितों का पता लगाना और उन तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है।

सीमा पार भी फैला संक्रमण

इबोला का खतरा अब केवल कांगो तक सीमित नहीं रहा है। पड़ोसी देश युगांडा में भी अब तक 20 पुष्ट मामले सामने आए हैं। राहत की बात यह है कि युगांडा में स्थानीय स्तर पर संक्रमण फैलने का कोई मामला अभी तक नहीं दिखा है वहां अधिकांश मामले बाहर से आए लोगों के हैं जिन्हें क्वारंटाइन के दौरान चिह्नित किया गया है।

इस खतरे से निपटने के लिए डीआरसी और युगांडा ने एक संयुक्त प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित किया है। दोनों देशों के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसके तहत वे निगरानी संबंधी जानकारी साझा करेंगे और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्क्रीनिंग एवं उपचार क्षमता को मजबूत करेंगे।

इलाज की तलाश जारी

वर्तमान में इबोला के बुंडिबुग्यो वायरस के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, WHO ने मरीजों को शामिल करते हुए एक क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया है ताकि संभावित उपचारों का मूल्यांकन किया जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, इटुरी और नॉर्थ किवू जैसे माइनिंग जोन में लोगों की निरंतर आवाजाही ने वायरस के प्रसार को और अधिक सुलभ बना दिया है, जिससे इस घातक बीमारी को नियंत्रित करना एक बड़ी वैश्विक चुनौती बन गया है।

IANS इनपुट के साथ- 

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