आलू और शकरकंद (सौ. फ्रीपिक)
Blood Sugar Control Diet: भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस बीमारी में सही डाइट का बहुत ही महत्व है। गलत खानपान शुगर लेवल बढ़ा सकता है। ऐसे में अपनी थाली में कुछ खास चीजों को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। अक्सर लोग आलू को डायबिटीज में खाना छोड़ देते हैं तो ऐसे में आप इसकी जगह कुछ और शामिल कर सकते हैं। जिससे आपका ब्लड शुगर कंट्रोल में रह सकता है।
डायबिटीज मैनेजमेंट में सबसे अहम भूमिका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) की होती है। यह पैमाना बताता है कि कोई भी भोजन कितनी तेजी से ग्लूकोज में बदलकर खून में मिलता है। सफेद आलू का GI अक्सर हाई (80-90) होता है जो शुगर को तुरंत स्पाइक करता है। वहीं शकरकंद का GI मध्यम (55-65) होता है। इसका मतलब है कि शकरकंद खाने पर शुगर उतनी तेजी से नहीं बढ़ती जितनी आलू खाने पर।
आमतौर पर आलू को डायबिटीज का सबसे बड़ा विलेन माना जाता है लेकिन रिसर्च के अनुसार हर आलू एक जैसा नहीं होता। आलू की कुछ किस्मों में रेसिस्टेंट स्टार्च होता है जो धीरे पचता है। समस्या तब बढ़ती है जब हम इसे तलकर (फ्रेंच फ्राइज या टिक्की) या ज्यादा मसालों के साथ खाते हैं। जानकारों का कहना है कि अगर आलू को उबालकर ठंडा कर लिया जाए तो उसका स्टार्च स्ट्रक्चर बदल जाता है जो शुगर लेवल के लिए थोड़ा कम खतरनाक हो जाता है।
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शकरकंद स्वाद में मीठा होने के बावजूद डायबिटीज के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है। इसमें फाइबर की प्रचुर मात्रा होती है जो कार्बोहाइड्रेट के पचने की गति को धीमा कर देती है। साथ ही इसमें मौजूद विटामिन ए, सी और एंटीऑक्सीडेंट्स इंसुलिन रेजिस्टेंस को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। आयुर्वेद में भी इसे ऊर्जा का संतुलित स्रोत माना गया है बशर्ते इसका सेवन सीमित मात्रा में किया जाए।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के अनुसार डायबिटीज का मतलब किसी चीज को पूरी तरह बंद करना नहीं बल्कि पोर्शन कंट्रोल (सीमित मात्रा) है। यदि आपको चुनाव करना हो तो शकरकंद प्राथमिकता है। लेकिन अगर आप आलू खाना चाहते हैं तो उसे दाल या हाई-फाइबर हरी सब्जियों के साथ मिलाकर खाएं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शकरकंद एक विजेता के रूप में उभरता है लेकिन दिनचर्या में अनुशासन और संतुलित आहार ही ब्लड शुगर को काबू में रखने की असली चाबी है।