वजन घटाने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग फॉलो करता व्यक्ति (सौ. एआई)
Intermittent Fasting: सोशल मीडिया और फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स के दौर में इंटरमिटेंट फास्टिंग को वजन घटाने का जादुई नुस्खा माना जा रहा है। हालांकि बिना डॉक्टरी सलाह के घंटों भूखा रहना महिलाओं के लिए हॉर्मोनल असंतुलन, चिड़चिड़ापन और शारीरिक कमजोरी का कारण बन सकता है।
वजन कम करने और फिट दिखने की होड़ में आजकल इंटरमिटेंट फास्टिंग का चलन तेजी से बढ़ा है। इस डाइट में लोग 14 से 16 घंटे भूखे रहते हैं और एक सीमित समय में ही भोजन करते हैं। सुनने में यह तरीका जितना प्रभावी लगता है महिलाओं के लिए यह उतना ही जोखिम भरा साबित हो सकता है।
महिलाओं का हॉर्मोनल सिस्टम पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक संवेदनशील होता है। लंबे समय तक भूखा रहने से शरीर तनाव की स्थिति में चला जाता है जिससे कोर्टिसोल (स्ट्रेस हॉर्मोन) का स्तर बढ़ जाता है। इसका सीधा असर महिलाओं के पीरियड्स, थायरॉयड फंक्शन और फर्टिलिटी पर पड़ता है। कई शोध बताते हैं कि अनियमित उपवास से प्रजनन क्षमता से जुड़े हॉर्मोन्स का संतुलन बिगड़ सकता है।
हमारा पाचन तंत्र एक अग्नि की तरह है जिसे सही समय पर ईंधन चाहिए। भोजन में देरी से शरीर में वात दोष बढ़ जाता है जिससे गैस, सिरदर्द, चक्कर आना और थकान जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। वहीं विज्ञान मानता है कि बार-बार शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव होने से बेहोशी और घबराहट की शिकायत हो सकती है।
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इंटरमिटेंट फास्टिंग का एक बड़ा नुकसान मसल लॉस है। जब शरीर को समय पर कैलोरी नहीं मिलती तो वह ऊर्जा के लिए मांसपेशियों को गलाने लगता है। इससे वजन तो कम दिखता है लेकिन शरीर अंदर से खोखला हो जाता है। 6-8 घंटे की ईटिंग विंडो में प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्वों की कमी को पूरा करना लगभग असंभव हो जाता है।
डायबिटीज, लो ब्लड प्रेशर, गर्भवती महिलाओं और ईटिंग डिसऑर्डर से जूझ रहे लोगों के लिए यह डाइट जानलेवा हो सकती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि शरीर को क्रैश डाइट पर डालने के बजाय संतुलित आहार और नियमित व्यायाम का रास्ता चुनें। किसी भी ट्रेंड को फॉलो करने से पहले अपनी हेल्थ रिपोर्ट और डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें।