अब दांतों की वैक्सीन के लिए नहीं होगी सुई की जरूरत, वैज्ञानिकों ने खोज निकाला यह तरीका
Vaccine for Teeth: दांतों के दर्द औऱ इंजेक्शन के बारे में सोचते हुए टेक्सास यूनिवर्सिटी के इंजीनियर ने फ्लॉस के जरिए वैक्सीन लगाने का तरीका खोज निकाला है।
- Written By: दीपिका पाल
फ्लॉस बना वैक्सीन का नया तरीका (सौ.सोशल मीडिया)
Floss Vaccine for Teeth: वैज्ञानिक एक से बढ़कर एक तरीके खोज रहे है जहां पर दांतों की समस्या के लिए भी वैज्ञानिकों ने हाल ही में अविष्कार किया है। यानि दांतों के दर्द औऱ इंजेक्शन के बारे में सोचते हुए टेक्सास यूनिवर्सिटी के इंजीनियर ने फ्लॉस के जरिए वैक्सीन लगाने का तरीका खोज निकाला है। इसे आसान तरीका मानते हुए हैरान कर देने वाली खोज की है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि दांत और मसूड़ों के बीच का छोटा-सा हिस्सा, जिसे gingival sulcus कहा जाता है यह वैक्सीन पहुंचाने का सही तरीका है।
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कैसे हुई रिसर्च
यहां पर टेक्सास टेक यूनिवर्सिटी के एस.जे. इंग्रोल और नॉर्थ कैरोलाइना स्टेट यूनिवर्सिटी के इंजीनियर हरविंदर गिल ने अनोखा तरीका खोज निकाला है। इस खोज में फ्लॉस (dental floss) यानी दांत साफ करने वाले धागे के जरिए वैक्सीन देने की खोज की है। बताया जा रहा है कि, रिसर्च में खास तरह फ्लॉस से चूहों को वैक्सीन दी गई, जिसके नतीजे हैरान करने वाले थे। बताया जा रहा है कि, जिन चूहों को फ्लॉस वैक्सीन दी गई है उनमें antibodies ज्यादा बनीं। वहीं घातक फ्लू से भी जान बची है उनकी इम्यूनिटी तक एक्टिव हो गई है।
इसके अलावा रिसर्चर्स ने 27 वॉलंटियर्स पर एक टेस्ट किया, जिसमें वैक्सीन की जगह फ्लॉस पर food dye लगाया गया। इसके परिणाम के अनुसार, करीब 60 प्रतिशत डाई मसूड़ों की सही जगह तक पहुंची. इससे साबित हुआ कि यह तरीका इंसानों में भी सफल हो सकता है।
जानिए कैसे मिलेगा फायदा
इस नई खोज के जरिए वैक्सीन के लिए सूई की जरूरत नहीं होगी तो वही पर फ्लॉस पर कोटेड वैक्सीन को ठंडा रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस प्रक्रिया के तहत फ्लॉस को पोस्ट से भेजा जा सकेगा और लोग खुद आसानी से इस्तेमाल कर पाएंगे। सबसे बड़ी बात इससे दर्द नहीं होगा यह बच्चों के लिए फायदा दिला सकती है। बताया जा रहा है कि, कुछ चुनौतियां भी इस खोज के साथ है जैसे हर बार सही मात्रा (dose consistency) में वैक्सीन पहुंचना जरूरी है।
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यह सुनिश्चित करने के लिए कि वैक्सीन सही जगह पहुँची है, तकनीकी समाधान निकालने होंगे। छोटे बच्चों (जिनके मसूड़ों में सही नहीं होते) पर इसका उपयोग अलग तरह से करना होगा। इस खोज को आकार में लाने के लिए वक्त लग सकता है।
