जीभ को साफ करते हुए व्यक्ति (सौ. एआई)
Oral Health Care Tips: जब भी हम सुबह उठते हैं तो सबसे पहले अपने दांतों को ब्रश करते हैं और उसके बाद ही दिन की शुरुआत होती है। लेकिन ब्रश के दौरान अक्सर कई लोग एक महत्वपूर्ण काम को नजरअंदाज कर देते हैं। दरअसल हम बात कर रहे हैं जीभ की सफाई की। जीभ की सफाई सिर्फ ओरल हाइजीन का हिस्सा नहीं है बल्कि यह पूरे शरीर के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। अगर आप रोजाना अपनी जीभ साफ नहीं करते हैं तो यह आदत आगे जाकर सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
सुबह जब आप आईने में अपनी जीभ देखते हैं और उस पर एक सफेद परत दिखाई देती है तो समझ लीजिए कि यह आपके शरीर के भीतर जमा विषाक्त पदार्थों का संकेत है। सुबह का समय वह वक्त होता है जब हमारा शरीर प्राकृतिक रूप से अशुद्धियों को बाहर निकालने का काम कर रहा होता है। यदि इन टॉक्सिन्स को जीभ से साफ नहीं किया गया तो ये वापस पेट में चले जाते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति को पाचन से जुड़े विकारों का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा जीभ साफ न करने से मुंह से दुर्गंध आना, स्वाद की पहचान न कर पाना और मुंह में हानिकारक बैक्टीरिया का बढ़ना जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। लंबे समय में यह लापरवाही दांतों को भी कमजोर बना सकती है।
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आयुर्वेद में इस छोटी सी आदत को जिह्वा शोधन कहा गया है जो पूरे शरीर को बीमारियों से बचाने की क्षमता रखती है। इसे करने का सही तरीका बेहद आसान है। सबसे पहले एक टंग क्लिनर लें और हल्के हाथों से जीभ को दो से तीन बार साफ करें। इसके बाद ही अपने दांतों को ब्रश से साफ करें और अच्छी तरह कुल्ला करें।
आयुर्वेद का एक और शक्तिशाली नुस्खा ऑयल पुलिंग है। इसके लिए मुंह में थोड़ा सा नारियल का तेल लेकर कुछ देर तक उसे चारों तरफ घुमाएं और फिर कुल्ला कर दें। यह प्रक्रिया न केवल जीभ पर जमे जिद्दी बैक्टीरिया को खत्म करती है बल्कि मुंह को गहराई से स्वच्छ बनाती है। इस अभ्यास से मुंह की दुर्गंध में सुधार होता है और बैक्टीरिया का स्तर काफी कम हो जाता है।
जीभ हमारे पाचन तंत्र का प्रवेश द्वार है। आयुर्वेद मानता है कि मुंह की स्वच्छता सीधे तौर पर हमारे पेट से जुड़ी होती है। जब हमारी जीभ और मुंह साफ होते हैं तो लार का निर्माण स्वस्थ तरीके से होता है। स्वस्थ लार भोजन को पचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए जीभ की सफाई की यह छोटी सी आदत कुछ ही दिनों में आपके पाचन और समग्र ऊर्जा स्तर में बड़े सकारात्मक बदलाव ला सकती है। अपनी सुबह की दिनचर्या में इस छोटे से बदलाव को शामिल करें और बीमारियों को अपने से दूर रखें।