Swine Flu Prevention: बारिश के मौसम में क्यों बढ़ जाता है स्वाइन फ्लू का खतरा? जानें कैसे करें बचाव
Swine Flu: इन्फ्लूएंजा ए वायरस संक्रमण वाले ज्यादातर इंसान सीधे तौर पर स्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस के संपर्क में आने से संक्रमित होते हैं या फिर संक्रमित सूअर के संपर्क में आने पर ऐसा होता है।
- Written By: रीता राय सागर
स्वाइन फ्लू (फोटो.सोशल मीडिया)
Monsoon Viral Infection: बारिश का मौसम कई तरह की बीमारियां लेकर आता है। जैसे डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, वायरल फ्लू, इन्फेक्शन, एलर्जी, गैस्ट्रोएंट्राइटिस, टाइफाइड, हेपेटाइटिस ए और ई सरीखी बीमारियां।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम की नम और ह्यूमिड परिस्थितियां स्वाइन फ्लू या इन्फ्लूएंजा के फैलने के लिए सही माहौल पैदा करती हैं। इससे सभी उम्र के लोग प्रभावित होते हैं।
स्वाइन फ्लू कैसे फैलता है?
स्वाइन फ्लू एक वायरल इंफेक्शन है। ये इंफ्लूएंज़ा A वायरस के सबटाइप H1N1 की वजह से होता है। स्वाइन फ्लू सांस से जुड़ी एक संक्रामक बीमारी है, जो खासतौर पर नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित करती है।
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स्वाइन फ्लू का वायरस हवा के जरिए फैलता है। जब इस वायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो उसके मुंह और नाक से निकलने वाली छोटी-छोटी बूंदों के ज़रिए वायरस हवा में फैल जाता है। अगर कोई दूसरा व्यक्ति इन्हें सांस के साथ अंदर ले लें, तो उसे स्वाइन फ्लू हो सकता है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने या वायरस से दूषित सतह को छूने के बाद आंख, नाक या मुंह को छूने से भी स्वाइन फ्लू हो सकता है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
इसके लक्षण आमतौर पर 1 से 4 दिन में दिखने लगते हैं। बीमारी के लक्षण दिखने के एक दिन पहले से लेकर अगले 3-4 दिनों तक व्यक्ति इस वायरस को फैला सकता है। स्वाइन फ्लू के आम लक्षण हैं- तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, शरीर में दर्द, सिरदर्द, थकान और कमजोरी। गंभीर मामलों में सांस लेने में दिक्कत, उल्टी और दस्त भी हो सकते हैं।
स्वाइन फ्लू, कुछ मामलों में गंभीर और जानलेवा हो सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही होते हैं और करीब हफ्ते भर में मरीज ठीक हो जाते हैं। लेकिन कभी-कभार, खासकर कमजोर इम्यूनिटी वालों, बच्चों, बुजुर्गों या बीमार लोगों में ये गंभीर हो सकता है और साथ ही कई जटिलताएं पैदा कर सकता है।
स्वाइन फ्लू (फोटो.सोशल मीडिया)
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
- बुखार आना
- शरीर में तेज दर्द
- सिर में तेज दर्द
- मांसपेशियों में दर्द
- गले में खराश और दर्द
- सर्दी-खांसी और जुकाम
- आंखों से पानी आना
- सांस फूलने की समस्या
स्वाइन का इलाज और बचाव
स्वाइन फ्लू के इलाज में एंटी वायरल दवा दी जाती हैं। इसमें खूब आराम करने की सलाह दी जाती है। ORS जैसे तरल पदार्थ का सेवन बढ़ा दिया जाता है।
स्वाइन फ्लू (फोटो.सोशल मीडिया)
स्वाइन फ्लू से बचने के उपाय
- अपने हाथों को बार-बार धोएं। इसके लिए साबुन या हैंड सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करें।
- खांसते या छींकते वक्त अपने मुंह को रूमाल से ढकें।
- मास्क का इस्तेमाल करें।
- टेबल और दूसरी सतहों को साफ रखें।
- किसी को स्वाइन फ्लू है, तो उसके संपर्क में आने से बचें।
- अगर आपको अपनी तबियत खराब लग रही है। फ्लू जैसे लक्षण हैं, तो तुरंत मास्क लगाएं और डॉक्टर से मिलें।
