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स्किन हो रही है ज्यादा सेंसिटिव? मौसम बदलने के साथ ये 5 कारण होते हैं जिम्मेदार, ऐसे करें बचाव
Skin Sensitivity Causes: सामान्य दिनों के मुकाबले सर्दी के मौसम में अचानक खुरदुरी, रूखी, खिंची हुई लगने लगती है। वैज्ञानिक शोध इस बदलाव के कई ठोस कारण बताते हैं।
- Written By: दीपिका पाल

त्वचा सेंसिटिव होने के 5 प्रमुख कारण (सौ.सोशल मीडिया)
Skin Care Tips in Hindi: सर्दियों का मौसम जारी है इस मौसम में अक्सर तापमान गिरने से शरीर पर बुरा असर पड़ता है। दुनिया के कई हिस्सों में नवंबर का महीना आधिकारिक तौर पर सर्दियों की शुरुआत माना जाता है, लेकिन जिन्हें अपनी स्किन से प्यार है उनके लिए ये ‘स्किन बैरियर गिरने का महीना’ होता है। सर्दी के इस मौसम में त्वचा पर बुरा असर देखने के लिए मिलता है।
सामान्य दिनों के मुकाबले सर्दी के मौसम में अचानक खुरदुरी, रूखी, खिंची हुई लगने लगती है। वैज्ञानिक शोध इस बदलाव के कई ठोस कारण बताते हैं। कई कारण ऐसे होते है जो त्वचा को नुकसान पहुंचाने के काम करते है।
जानिए त्वचा पर बुरा असर डालने वाले कारण
सर्दी के मौसम में तापमान पर बुरा असर डालने के लिए इन प्रकार के कारण जिम्मेदार हो सकते है।
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1- पहला कारण- हवा में नमी का गिरना
सर्दी के मौसम में अक्सर तापमान गिरने से नमी का स्तर भी कम हो जाता है। इसे लेकर अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी (एएडी) के अनुसार, जब तापमान गिरता है तो हवा की आर्द्रता 30–50 फीसदी तक कम हो जाती है। त्वचा की ऊपरी परत, जिसे स्ट्रेटम कॉर्नियम कहा जाता है, नमी को बनाए रखने के लिए वातावरण पर निर्भर होती है। जिस तरह से तापमान गिरता है उस तरह से ही त्वचा की परत पानी खोने लगती है और त्वचा में माइक्रो-क्रैक्स बन जाते हैं। यही हमारे यहां नवंबर वाली ड्राईनेस का आधार है।
2-दूसरा कारण -हवा की गति
सर्दियों के मौसम में नवंबर का महीना सर्द वाला होता है। इस महीने में हवा अधिक शुष्क और तेज चलती है। यह हवा त्वचा की सतह पर मौजूद प्राकृतिक तेलों को हटा देती है। इस समस्या को लेकर ब्रिटिश जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी की 2019 की स्टडी ने बताया है कि, सिर्फ 15 मिनट की ठंडी हवा भी त्वचा की लिपिड लेयर को 20–25 फीसदी तक कमजोर कर सकती है। हवा की वजह स्किन पर तो बुरा असर पड़ता ही है होंठ फटने, गालों पर जलन और हाथों में रूखापन महसूस करते हैं।
3-तीसरा कारण- ‘ट्रांस-एपिडर्मल वॉटर लॉस (टीईडब्ल्यूएल) का बढ़ जाना
इस कारण की वजह से भी त्वचा पर बुरा असर पड़ता है। इस कारण को लेकर एक स्टडी जर्नल ऑफ इंवेस्टिगेटिव डर्मेटोलॉजी में बताया गया है कि, जब मौसम अचानक बदलता है, त्वचा का बैरियर प्रोटीन “फिलैग्रिन” कमजोर पड़ता है। इस समस्या में त्वचा से पानी बाहर निकलने की रफ्तार बढ़ जाती है। नवंबर में दिन-रात के तापमान में बड़ा अंतर होता है, जिससे यह और तेज हो जाती है।
सर्दी में कम बनता है सीबम
त्वचा में बनने वाला प्राकृतिक तेल, सर्दी के मौसम में कम ही होता है। इसमें तापमान गिरने पर त्वचा की ऑयल ग्लैंड्स सुस्त पड़ जाती हैं। डर्मेटोलॉजी रिसर्च एंड प्रैक्टिस की एक स्टडी में पाया गया कि नवंबर से जनवरी के बीच सीबम लेवल औसतन 20–30 फीसदी तक कम हो जाता है। यह सीबम चेहरे और हाथों की त्वचा पर प्रभाव डालते है। सीबम कम होने से त्वचा की सुरक्षा कवच पतला हो जाता है और नमी तेजी से उड़ जाती है।
विटामिन डी का लेवल होता है कम
सर्दी के मौसम में ऐसा होता है कि, यूवी किरणें भी बदलने लगती है। इस मौसम में सर्द हवाएं चलने से धूप कम निकलती है। धूप कम होने से विटामिन डी का स्तर गिरता है, जिससे त्वचा की कोशिकाएं धीमी गति से रिन्यू होती हैं। इससे त्वचा थकी और डिहाइड्रेटेड लगने लगती है। हल्की धूप और ठंडी हवा मिलकर त्वचा की संवेदनशीलता भी बढ़ा देते हैं।
एक और रोचक कारण है और वो है स्किन माइक्रोबायोम का बदलना। त्वचा पर अच्छे बैक्टीरिया की एक परत होती है जो नमी संतुलित रखती है। बदलते मौसम की शुष्क हवा इस माइक्रोबायोम को प्रभावित करती है। 2022 की एक स्टडी बताती है कि सर्दियों की शुरुआत में माइक्रोबायोम की विविधता कम हो जाती है, जिससे त्वचा की नमी और कम हो जाती है।
आईएएनएस के अनुसार
Skin sensitivity weather change 5 main causes
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