नागपुर शहर में जलवायु परिवर्तन से बढ़ा हीटवेव खतरा, स्वास्थ्य पर गंभीर असर; विशेषज्ञों ने जताई चिंता

Nagpur Climate Change: जलवायु परिवर्तन और बढ़ती हीटवेव पर विशेषज्ञों ने चिंता जताई। पिछले दशक में उष्ण लहरों में 32% वृद्धि और हजारों मौतों के आंकड़ों ने स्वास्थ्य जोखिम बढ़ने के संकेत दिए।
Climate Change Escalates Heatwave Threat in Nagpur City, Posing Serious Health Risks; Experts Express Concern
हीटवेव खतरा,(सोर्स: सौजन्य AI)
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Nagpur Heatwave Health Impact: नागपुर शहर में जलवायु परिवर्तन ने कई आयाम बदल दिए हैं। पिछले 10 वर्षों में तो इसमें तेजी से बदलाव हुआ है। इस बदलाव का असर मनुष्य के साथ-साथ पशुओं और पर्यावरण पर भी पड़ रहा है। पिछले दशक में हीटवेव (उष्ण लहर) में 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं इसी दशक में लगभग 11,000 से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं।

यह जानकारी महाराष्ट्र स्वास्थ्य सेवा के महामारी विभाग के सेवानिवृत्त राज्य सर्वेक्षण अधिकारी डॉ. प्रदीप आवटे ने दी। वे प्रादेशिक मौसम केंद्र, मुंबई प्रेस क्लब और असर सोशल इम्पैक्ट एडवाइजर्स के संयुक्त तत्वावधान में हीटवेव, स्वास्थ्य और जलवायु पत्रकारिता विषय पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस अवसर पर प्रादेशिक मौसम केंद्र के निदेशक वैज्ञानिक डॉ. प्रवीणकुमार, सुहास जोशी और विराट सिंह उपस्थित रहे।

11 प्रतिशत मौतें हार्ट अटैक से

डॉ. आवटे ने बताया कि 2014 से 2023 के एक दशक में देशभर में 32 प्रतिशत अधिक हीटवेव आई। वहीं 2011 से 2020 के 10 वर्षों में 11,500 लोगों की मृत्यु हुई। हीटवेव के कारण विदर्भ में भी बड़ी संख्या में जानहानि हुई है। गमों के कारण 11 प्रतिशत मौतें हार्ट अटैक से होती है और हीट स्ट्रोक होने के बाद समय पर उपचार न मिलने से लगभग 40 से 60 प्रतिशत मौते हो जाती है। उन्होंने गर्मियों में स्वास्थ्य की पर्याप्त देखभाल करने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की। इस दौरान गर्मी पर आधारित नसीरुद्दीन शाह। अनुष्का शाह व मौसम विशेषज्ञ हरीश बोरा द्वारा निर्मित 'इट्स ओन्ली 47 डिग्री लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई,

20 सेवाओं को सहायता

इस अवसर पर डॉ. प्रवीणकुमार ने मौसम से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी। विभाग द्वारा दी गई पूर्व चेतावनियां, पूर्वानुमान और अलर्ट के कारण देश में मानवीय और आर्थिक नुकसान को कम करने में मौसम विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सटीक मौसम पूर्वानुमान के कारण न केवल आम नागरिको और किसानों को, बल्कि हवाई अड्डे, रेलवे, मेट्रो, नासा व अन्य संस्थाओं को भी काफी लाभ होता है, वर्तमान में प्रादेशिक मौसम विभाग तालुका स्तर तक जानकारी उपलब्ध कराता है।

गर्मी, बारिश, ठंड-सब कुछ जरूरत से ज्यादा

डॉ. आवटे ने कहा कि क्लाइमेट चेंज के कारण हाल के समय में गर्मी, बारिश और ठंड सब कुछ अत्यधिक मात्रा में देखने को मिल रहा है। इसके लिए मूलत हम मनुष्य ही पूरी तरह जिम्मेदार है।

अत्यधिक वृक्षों की कटाई, प्रकृति पर अतिक्रमण, बढ़ता प्रदूषण, कंक्रीटीकरण, औद्योगिकीकरण आदि नानव निर्मित कारण इसमें प्रमुख है। इससे न केवल प्राकृतिक चक्र बदला है, बल्कि गंभीर और खतरनाक बीमारियों की संख्या भी बढ़ी है। गर्मियों में बार-बार आने वाली हौटवेव अधिक चिंता का विषय बन गई है।

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