अमेरिका के जंगली खरगोशों को डरावना बना रहा ये वायरस, क्या इंसानों को होता है इसका खतरा
Shope Papillomavirus- SPV: अमेरिका के जंगलों में जंगली खरगोशों के बीच एक खतरनाक वायरस का प्रकोप बढ़ रहा है। यह वायरस इतना खतरनाक है कि, इसके चपेट में आने वाले जानवरों का चेहरा भयानक नजर आता है।
- Written By: दीपिका पाल
जंगली खरगोशों में फैल रहा है जॉम्बी वायरस (सौ.सोशल मीडिया)
Shope Papillomavirus- SPV: दुनियाभर में कई बीमारियां पनपती रहती है। इसमें ही अमेरिका के जंगलों में जंगली खरगोशों के बीच एक खतरनाक वायरस का प्रकोप बढ़ रहा है। यह वायरस इतना खतरनाक है कि, इसके चपेट में आने वाले जानवरों का चेहरा भयानक नजर आता है। यानि इस वायरस की वजह से खरगोश जॉम्बी की शक्ल के नजर आते है।
इस वायरस में खरगोश के चेहरे, सिर या कान पर सींग या टेंटेकल जैसा कुछ निकल आते हैं। इसी वजह से लोग इन्हें ‘जॉम्बी बनीज’ कहने लगे हैं। यह वायरस इंसानों को किस तरह से प्रभावित करता है और क्या होते है इस वायरस के लक्षण चलिए जान लेते हैं इस खबर में…
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कैसी है ये बीमारी
इस बीमारी शोप पैपिलोमा वायरस (Shope Papillomavirus- SPV) या कॉटनटेल रैबिट पैपिलोमा वायरस (CRPV) की बात करें तो, यह एक तरह का खतरनाक अजीब वायरस है जो आमतौर पर जंगली कॉटनटेल खरगोशों को चपेट में लेती है। इतना ही नहीं इस बीमारी के प्रकोप में आने वाले जंगली खरगोश के चेहरे, सिर या कान पर सींग या टेंटेकल जैसा कुछ निकल आते हैं। इसी वजह से लोग इन्हें ‘जॉम्बी बनीज’ कहने लगे हैं। इस बीमारी की वजह से खरगोशों को देखने और खाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
क्या है वायरस और कैसे फैलता है
इस वायरस की बात की जाए तो, यह एक तरह का डीएनए वायरस है जो खरगोशों को निशाना बनाता है यानि चपेट में लेता है। इस वायरस की सबसे पहले पहचान 1930 के दशक में डॉ. रिचर्ड शोप ने की थी। ये वायरस खरगोश के सिर, चेहरे और कान पर मस्सों जैसे ट्यूमर यानी कि बना देता है। ये उभार कभी-कभी छोटे सींग या मांसल टेंटेकल जैसे नजर आते हैं। साथ ही इस वायरस के कारण कभी-कभी कैंसर के भी लक्षण बन जाते है। पालतू खरगोशों को ये वायरस कम ही होता है, लेकिन अगर वे संक्रमित जंगली खरगोशों या कीड़ों के संपर्क में आएं तो संक्रमित हो सकते हैं।
संक्रमित खरगोश के सीधे संपर्क में आने से, खून चूसने वाले कीड़ों के काटने से, जैसे मच्छर, पिस्सू और चिपकू कीड़े। बताया जाता है कि, ये कीड़े अक्सर खरगोश के सिर और कान पर काटते हैं, क्योंकि वहां का बाल पतला होता है। छोटे घाव से वायरस आसानी से अंदर चला जाता है और फिर स्किन के सेल्स तेजी से बढ़ने शुरू हो जाती है, जिससे ट्यूमर बन जाता है।
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जानिए कैसे प्रभावित करता है यह वायरस
इस खतरनाक शोप पैपिलोमा वायरस की बात की जाए तो, यह खरगोश को प्रभावित करने के साथ ही इनके लिए बेहद ही जानलेवा साबित होता है। बताया जाता है कि, इस वायरस के प्रकोप में आने से शरीर को ज्यादा नुकसान होते है।
- आंखों के पास बड़े उभार होने से उन्हें दिखना मुश्किल हो जाता है।
- मुंह या नाक के पास गांठ बनने से खाना-पीना और सांस लेना कठिन हो जाता है।
- ऐसे खरगोश कमजोर हो जाते हैं, जिससे शिकारी उन्हें आसानी से पकड़ लेते हैं।
- कुछ खरगोशों में ये उभार अपने आप कम हो जाते हैं, लेकिन कई मामलों में ट्यूमर लंबे समय तक बने रहते हैं।
ये वायरस सिर्फ खरगोशों में ही फैलता है। इंसान, कुत्ते, बिल्ली या दूसरे पालतू जानवर इससे संक्रमित नहीं होते हैं। हालांकि, पालतू खरगोशों में संक्रमण का खतरा बना रहता है, इसलिए उन्हें मच्छरों और पिस्सुओं से बचाएं। जंगली खरगोशों से दूर रखें।
