प्रेगनेंसी में बार-बार चक्कर आना हो सकता है खतरनाक! जानिए एनीमिया के शुरुआती संकेत, मिनटों में ऐसे करें पहचान
Early Signs Of Anemia: गर्भावस्था के दौरान बार-बार चक्कर आना, थकान, कमजोरी जैसे लक्षण एनीमिया की ओर इशारा कर सकते हैं। यह मां और बच्चे दोनों की सेहत पर असर डाल सकती है इसलिए इसे नजरअंदाज न करें।
- Written By: प्रीति शर्मा
गर्भवती महिला की जांच करते डॉक्टर (सौ. एआई)
Pregnancy Anemia Symptoms: गर्भावस्था के दौरान थकान और चक्कर आना अक्सर सामान्य मान लिया जाता है लेकिन यह एनीमिया जैसी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। शरीर में आयरन की कमी न केवल मां की सेहत बिगाड़ती है बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास को भी रोक सकती है। समय रहते इसकी पहचान और सही डाइट ही इसका सबसे बड़ा समाधान है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और असंतुलित खान-पान के कारण गर्भवती महिलाओं में एनीमिया एक आम समस्या बन चुकी है। जब शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है तो अंगों तक ऑक्सीजन कम पहुंचती है जिससे थकान और कमजोरी महसूस होती है।
क्यों बढ़ जाता है प्रेगनेंसी में खतरा
गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर को खुद के साथ-साथ प्लेसेंटा और बच्चे के विकास के लिए अतिरिक्त रक्त की आवश्यकता होती है। ऐसे में आयरन की मांग अचानक बढ़ जाती है। यदि डाइट में आयरन की कमी हो या दो गर्भधारण के बीच कम समय का अंतराल हो तो एनीमिया का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
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इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
- एनीमिया केवल थकान तक सीमित नहीं है इसके कुछ स्पष्ट संकेत इस प्रकार हैं।
- लगातार चक्कर आना और सांस फूलना।
- दिल की धड़कन का तेज या अनियमित होना।
- त्वचा, होंठ और नाखूनों का पीला पड़ना।
- हाथ-पैरों का हमेशा ठंडा रहना।
- चिड़चिड़ापन और किसी काम में मन न लगना।
यदि हीमोग्लोबिन का स्तर 10.9 g/dL से कम है तो इसे गंभीरता से लें।
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सुपरफूड्स जो बढ़ाएंगे खून
दवाइयों से पहले अपनी थाली में बदलाव करना सबसे सुरक्षित तरीका है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही इन चीजों को आयरन का पावरहाउस मानते हैं।
हरी सब्जियां: पालक, मूली के पत्ते और सहजन (Drumstick) के पत्ते आयरन से भरपूर होते हैं।
फल और ड्राई फ्रूट्स: खजूर, अनार, सेब, अमरूद और आंवला का सेवन हीमोग्लोबिन तेजी से बढ़ाता है।
अंकुरित अनाज: बीन्स और अंकुरित अनाज फोलिक एसिड के बेहतरीन स्रोत हैं।
चुकंदर और गाजर: इनका जूस या सलाद रक्त संचार में जादुई सुधार करता है।
डॉक्टर से कब मिलें
घरेलू उपचार अपनी जगह हैं लेकिन यदि हीमोग्लोबिन 7 g/dL से कम हो जाए या उपचार के बाद भी सुधार न दिखे तो बिना देरी किए विशेषज्ञ से सलाह लें। ऐसे समय में आपकी सतर्कता ही आपके बच्चे के स्वस्थ भविष्य की नींव है।
