प्रीडायबिटीज को हल्के में लेना पड़ सकता है दिल पर भारी, स्टडी में हुआ ये चौंकाने वाला खुलासा!
Prediabetes Cause Heart Problem: प्री डायबिटीज को नजरअंदाज करना दिल की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। अगर समय रहते इसे कंट्रोल नहीं किया गया तो यह गंभीर समस्या बन सकती है।
- Written By: प्रीति शर्मा
प्रीडायबिटीज (सौ. फ्रीपिक)
Prediabetes and Heart problems: प्रीडायबिटीज को अक्सर लोग मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन ए नई स्टडी में इसे दिल की सेहत के लिए गंभीर चेतावनी बताया गया है। रिसर्च के अनुसार अगर इस स्टेज पर लापरवाही बरती गई तो हार्ट अटैक का खतरा तेजी से बढ़ सकता है। चौंकाने वाली बात यह है कि अगर समय रहते प्री डायबिटीज को कंट्रोल किया जाए तो दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम कम हो सकता है।
द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी जर्नल में पब्लिश रिसर्च के अनुसार ब्लड ग्लूकोज को नॉर्मल लेवल पर लाने से यानी प्रीडायबिटीज को प्रभावी ढंग से ठीक करने से दिल की बीमारी से मौत या हार्ट फेलियर के लिए हॉस्पिटल में भर्ती होने का खतरा कम हो जाता है।
यह खोज खासकर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हालिया रिसर्च से पता चला है कि सिर्फ लाइफस्टाइल में बदलाव जिसमें एक्सरसाइज, वजन कम करना और खाने-पीने में सुधार शामिल है प्रीडायबिटीज वाले लोगों में कार्डियोवैस्कुलर जोखिम को कम नहीं करते हैं।
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स्टडी में खुलासा
किंग्स कॉलेज लंदन और यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ट्यूबिंग में डायबिटीज के रीडर लीड लेखक डॉक्टर एंड्रियास बिर्केनफेल्ड ने कहा कि यह स्टडी मॉडर्न प्रिवेंटिव मेडिसिन की सबसे बड़ी मान्यताओं में से एक को चुनौती देती है। सालों से प्रीडायबिटीज वाले लोगों से कहा जाता रहा है कि वजन कम करने के साथ-साथ ज्यादा एक्सरसाइज करने और हेल्दी खाना खाने से वे हार्ट अटैक और जल्दी मौत से बच सकते हैं। हालांकि ये लाइफस्टाइल में बदलाव निस्संदेह मूल्यवान हैं लेकिन सबूत इस बात का समर्थन नहीं करते कि वे प्रीडायबिटीज वाले लोगों में हार्ट अटैक या मृत्यु दर को कम करते हैं।
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बिर्केनफेल्ड के अनुसार इसके बजाय हम दिखाते हैं कि प्री डायबिटीज से छुटकारा पाने का संबंध जानलेवा कार्डियक घटनाओं, हार्ट फेलियर और सभी कारणों से होने वाली मृत्यु दर में स्पष्ट कमी से है।
प्रीडायबिटीज एक ऐसी स्थित है जिसमें ब्लड ग्लूकोज का स्तर सामान्य से ऊपर पहुंच जाता है लेकिन अभी इतना नहीं बढ़ता कि टाइप 2 डायबिटिज की पुष्टि हो सके।
लाइफस्टाइल में बदलाव
पिछली स्टडीज में दिखाया गया था कि लाइफस्टाइल में किए गए मिले-जुले बदलाव जिसमें ज्यादा एक्सरसाइज और हेल्दी खाना शामिल है। कार्डियोवैस्कुलर बीमारी को कम नहीं करते हैं। यह बताता है कि डायबिटीज की शुरुआत में देरी करना ही कार्डियोवैस्कुलर सुरक्षा की गारंटी नहीं देता जब तक कि महत्वपूर्ण मेटाबॉलिक बदलाव न हों।
बिरकेनफेल्ड ने कहा स्टडी के नतीजों का मतलब है कि प्रीडायबिटीज रिमिशन, ब्लड प्रेशर कम करने, कोलेस्ट्रॉल कम करने और स्मोकिंग छोड़ने के साथ, चौथे बड़े प्राइमरी प्रिवेंशन टूल के तौर पर अपनी जगह बना सकता है, जो सच में हार्ट अटैक और मौतों को रोकता है।
