

Female Intimate Hygiene: UTI जैसी समस्याओं का सबसे बड़ा कारण पर्सनल हाइजीन का ध्यान न रखना है। वैसे कई बार महिलाएं खुद को हाइजेनिक और फ्रेश महसूस कराने के लिए कई गलतियां कर देती हैं, जिससे गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
डॉक्टर बताते हैं कि महिलाएं अपने जननांग को अंदर से पानी या किसी लिक्विड से धोती हैं, जो बहुत ही गलत तरीका है। दरअसल, इंटीमेट पार्ट का नेचुरल pH होता है, जो बैक्टीरिया को बैलेंस करता है। अगर वजाइना में सीधे पानी जाता है, तो उसकी नेचुरल सेफ्टी खत्म हो जाती है। इस वजह से महिलाओं को इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए महिलाओं को डाउचिंग अवॉयड करना चाहिए।
महिलाओं को अपने प्राइवेट पार्ट्स में खूशबू वाली चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जैसे- परफ्यूम, पाउडर या कोई क्रीम। ऐसे प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से त्वचा में एलर्जी, खुजली और जलन कर सकता है। इससे वजाइना के नेचुरल फ्लोरा को भी नुकसान पहुंचता है।
अक्सर महिलाएं सिंथेटिक कपड़े या टाइट अंडरगारमेंट पहन लेती हैं। ऐसे कपड़े शरीर की नमी और गर्मी दोनों को बढ़ा देते हैं। इससे इंटीमेट एरिया में बैक्टीरिया या यीस्ट पनपने लगते हैं, जिससे इंफेक्शन बढ़ता है। अगर लगातार महिलाएं इस तरह के कपड़े पहनती हैं, तो गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए दिन में एक बार अंडरवियर जरूर बदलें और कॉटन के अंडरवियर पहनें।
कई महिलाएं पीरियड्स के दौरान अपने इंटीमेट हेल्थ को इग्नोर करती है, मसलन पैड्स चेंज न करना और साफ-सफाई में कोताही बरतना भारी पड़ सकता है। जिससे बैक्टीरिया की ग्रोथ बहुत ज्यादा हो जाती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए महिलाओं को पीरियड्स के दौरान पैड्स, टैम्पॉन या मेंस्ट्रुअल कप कुछ घंटों में बार-बार बदलते रहना चाहिए।
डॉक्टर बताते हैं कि इंटीमेट पार्ट्स पर खुजली, जलन, स्मेली या व्हाइट डिस्चार्ज या पेट के निचले हिस्से में दर्द होने पर डॉक्टर से जरूर मिलें। अक्सर महिलाएं शर्म के कारण डॉक्टर के पास जाने में हिचकते हैं, लेकिन ऐसा करके वे गंभीर बीमारियों को न्योता देती हैं।