जानिए शिशु मृत्यु दर मुख्य कारण क्या हैं (सौ.सोशल मीडिया )
World Health Day 2025: आज समूचे विश्व में विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जा रहा है। अगर इस साल विश्व स्वास्थ्य दिवस की थीम की बात करें तो, ‘Healthy beginnings, Hopeful futures’ इसे सरल भाषा में समझें तो, स्वस्थ शुरूआत से आशावादी भविष्य का निर्माण करना है। हर साल हेल्थ डे की थीम बदलती रहती है इस बार गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और नवजात शिशुओं की देखभाल पर निर्भर थीम है।
लेकिन, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के हालात इस थीम के बिल्कुल उलट तस्वीर पेश कर रहे है। सरकारी कोशिशों के बावजूद दिल्ली में हर दिन औसतन 20 नवजात शिशु जन्म के पहले साल में दम तोड़ रहे है। ये आंकड़ा न सिर्फ चिंताजनक है, बल्कि मातृ और शिशु स्वास्थ्य के मोर्चे पर हमारी नाकामी की कहानी भी बयां करता है।
जानकारों के अनुसार, साल 2023 में दिल्ली में कुल 7439 नवजात शिशुओं की मौत हुई। इनमें से 60 प्रतिशत बच्चों की मौत चार महीने की उम्र से पहले ही हो गई। बता दें, शिशु मृत्यु दर बढ़कर 23.61 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो अमेरिका जैसे विकसित देशों की तुलना में कई गुना ज्यादा है। अमेरिका में यह दर प्रति हजार जन्म पर महज 5 से 6 होती है।
जानिए शिशु मृत्यु दर मुख्य कारण क्या हैं
डॉक्टर्स और विशेषज्ञ मानते हैं कि सबसे बड़ी वजह है गर्भावस्था के दौरान मां और बच्चे का पर्याप्त पोषण और देखभाल न मिल पाना। इसके अलावा,राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में इलाज की सुविधा की कमी, खासकर नवजात शिशुओं के लिए जरूरी NICU और PICU यूनिट बड़ी समस्या है। इमरजेंसी सिजेरियन सर्जरी की सुविधा भी कई अस्पतालों में उपलब्ध नहीं है।
शिशुओं की मौत के प्रमुख कारण :
गर्भ में सही विकास न हो पाना और कुपोषण – 20.45%
निमोनिया – 18.51%
सेप्टिसीमिया – 14.95%
सांस की तकलीफ और ऑक्सीजन की कमी – 9.49%
शॉक और अन्य जटिल बीमारियां – 6.27%
जानकारी की मानें तो, दिल्ली में संस्थागत प्रसव की दर 95.58% तक पहुंच चुकी है, जिससे मातृ मृत्यु दर में गिरावट तो आई है, लेकिन फिर भी 2023 में 142 गर्भवती महिलाओं की जान चली गई। सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएं जैसे जननी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और पोषण अभियान, सभी महिलाओं तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
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जरूरत इस बात की है कि केवल योजनाएं बनाना ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर उन तक पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है। विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर यह सवाल सबसे बड़ा है कि क्या हम अपने बच्चों को एक स्वस्थ शुरुआत और आशापूर्ण भविष्य दे पा रहे हैं।