पेट और दिमाग के संबंध (सौ. सोशल मीडिया)
Digestion And Mental Health: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम शारीरिक चोट पर तो तुरंत ध्यान देते हैं लेकिन मन की बेचैनी को अक्सर काम का तनाव कहकर नजरअंदाज कर देते हैं। विज्ञान कहता है कि एंग्जायटी सिर्फ विचारों का खेल नहीं है। इसकी जड़ें हमारे नर्वस सिस्टम और पाचन तंत्र में बहुत गहराई तक धंसी हुई हैं।
हमारे मस्तिष्क का एक खास हिस्सा खतरा महसूस होने पर शरीर को सचेत करता है। लेकिन एंग्जायटी की स्थिति में यह हिस्सा बिना किसी वास्तविक खतरे के ही चेतावनी जारी करने लगता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर में स्ट्रेस हार्मोन तेजी से बढ़ने लगते हैं। यही कारण है कि अचानक दिल की धड़कन तेज होना, सांस फूलना और छोटी-छोटी बातों पर पसीना आने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। जब यह प्रक्रिया बार-बार होती है तो तन और मन दोनों पूरी तरह थक जाते हैं।
हैरानी की बात यह है कि आपकी घबराहट का सीधा संबंध आपके पेट से है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों मानते हैं कि अगर पाचन प्रक्रिया सही नहीं है तो शरीर को आवश्यक पोषण नहीं मिलता। खराब पाचन से शरीर में भारीपन और उदासीनता आती है जो अंततः मानसिक तनाव को जन्म देती है। पेट में गड़बड़ी होने पर नींद प्रभावित होती है और अधूरी नींद सिरदर्द व मानसिक कमजोरी का सबसे बड़ा कारण बनती है। सरल शब्दों में कहें तो अगर पेट खुश नहीं है तो दिमाग भी शांत नहीं रह सकता।
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एंग्जायटी से लड़ने के लिए सिर्फ दवाएं काफी नहीं हैं बल्कि जीवनशैली में बदलाव जरूरी है।
मन पर काबू: छोटी बातों पर घबराने के बजाय खुद को यह समझाएं कि यह स्थिति अस्थायी है। खुद को सकारात्मक रूप से प्रेरित करें।
प्रकृति से जुड़ाव: हरी-भरी जगहों पर समय बिताने से मस्तिष्क को शांति मिलती है और स्ट्रेस हार्मोन का स्तर कम होता है।
पसंदीदा और सुपाच्य आहार: ऐसा भोजन करें जो पचने में आसान हो और आपके मन को खुशी दे। मन को अपने अनुसार चलाना ही असली समाधान है।
एंग्जायटी को समझना ही उससे बचने की पहली सीढ़ी है। अपने पाचन और नींद का ख्याल रखकर आप आधे से ज्यादा मानसिक परेशानियों को जड़ से खत्म कर सकते हैं। खुद को प्रेरित रखें और याद रखें कि आपका मानसिक स्वास्थ्य भी आपकी प्राथमिकता है।