

Earphones And Hearing Loss: आज की तेज़ रफ़्तार जिंदगी में, ईयरफोन और हेडफोन हमारे रोज़मर्रा के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। चाहे वह म्यूजिक सुनना हो, कॉल पर बात करना हो, या वर्क फ्रॉम होम के दौरान ज़ूम मीटिंग्स में शामिल होना हो, ये गैजेट्स हमारे लिए बेहद ज़रूरी हो गए हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ईयरफोन के अधिक उपयोग के कारण कान से संबंधित बेहरेपन एवं अन्य बीमारियों होने लगी है।
इसके अधिक और तेज आवाज में उपयोग के कारण कम उम्र में ही लोगों को कम सुनने की शिकायत होने लगी है। लेकिन फिर भी लोग इसपर ध्यान नहीं देते हैं। इनके अधिक उपयोग के बीच हम ये भूल गए कि ईयरफोन हमारे लिए कितना हानिकारक है।
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. शेनल कोठारी का कहना है कि, सभी लोगों को यह जानना जरूरी है कि यदि तेज आवाज के कारण कान की नस को नुकसान पहुंच जाता है, तो उसके ठीक होने की संभावना काफी कम रहती है। यही कारण भी है कि इन दिनों शहर के शासकीय और निजी अस्पतालों में भी इस तरह के मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक ईयरफोन के ज्यादा इस्तेमाल से ना केवल सुनने की क्षमता प्रभावित होती है बल्कि कान में इंफेक्शन और पर्दे भी ख़राब होने की संभावना हो जाती है। ईयरफोन से निकलने वाली आवाज़ ईयरड्रम के करीब से टकराती है, ऐसे में ईयरड्रम को नुकसान होने की संभावना रहती है।
समस्या ज्यादा बढ़ने पर बहरेपन का ख़तरा भी बढ़ जाता है। कोरोना के बाद से बच्चों में कम सुनने की शिकायत अधिक देखने को मिल रही है। क्योंकि इस दौरान आनलाइन क्लास में मोबाइल के साथ ही ईयरफोन का उपयोग भी अधिक हुआ था।
ईयरफोन से होने वाली समस्याओं में दो कारण होते हैं। कितनी तेज आवाज में सुन रहे हैं और कितनी देर सुन रहे हैं। वैसे तो इसका उपयोग से बचना चाहिए, लेकिन हम उपयोग कर भी रहे हैं तो उसकी आवाज इतनी कम होना चाहिए कि हमें बाहर की आवाज भी सुनाई दें।