बीटा ब्लॉकर्स दवाईयां (सौ.सोशल मीडिया)
नई दिल्ली। दुनियाभर में कई बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है जिसके इलाज के लिए वैज्ञानिक नई दवाईयां इजाद कर रहे है। दिल का दौरा या हार्ट अटैक की समस्या के इलाज के लिए बीते 40 सालों से मानक उपचार के रूप में इस्तेमाल होने वाली बीटा ब्लॉकर्स दवाईयों का सेवन किया जा रहा है। कम लोग ही जानते है कि, बीटा ब्लॉकर्स फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके प्रयोग से कुछ महिलाओं का डेथ रिस्क बढ़ सकता है।
बताया जा रहा है कि, इस दवाई को लेकर स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट पैराडाइम (मानक उपचार प्रतिमान) में बदलाव को लेकर स्टडी सामने आई है।
बताया जा रहा है कि, अगर आप ज्यादा मात्रा में हार्ट अटैक की समस्या के लिए बीटा ब्लॉकर्स दवाईयों का सेवन करते है तो यह नुकसान साबित होता है। यह उन रोगियों के लिए कोई नैदानिक लाभ प्रदान नहीं करती है जिनका मायोकार्डियल इन्फार्कशन यानी आम बोलचाल की भाषा में कहें तो दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ा हो। इसके अलावा मैड्रिड में यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी कांग्रेस में प्रस्तुत और द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन और यूरोपियन हार्ट जर्नल में एक साथ प्रकाशित इस अध्ययन से पता चला है कि बीटा ब्लॉकर्स से जिन महिलाओं का इलाज किया गया उनकी डेथ और हार्ट अटैक रिस्क उन महिलाओं की बनिस्बत ज्यादा था जिन्हें ये नहीं दी गईं। इसके विपरित पुरुषों को इसका नुकसान ज्यादा नहीं देखा गया है।
बताया जाता है कि, माउंट सिनाई फस्टर हार्ट हॉस्पिटल के अध्यक्ष और वरिष्ठ अन्वेषक वैलेंटिन फस्टर ने कहा, “यह अध्ययन सभी इंटरनेशनल क्लिनिकल गाइडलाइंस (अंतरराष्ट्रीय नैदानिक दिशानिर्देशों) को नया रूप देगा।” स्पेन स्थित सेंट्रो नैशनल डी इन्वेस्टिगेशियोनेस कार्डियोवैस्कुलरेस (सीएनआईसी) के वैज्ञानिक निदेशक और प्रमुख शोधकर्ता बोर्जा इबानेज ने कहा, “वर्तमान में, बिना किसी जटिलता वाले मायोकार्डियल इन्फार्क्शन वाले 80 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों को बीटा ब्लॉकर्स पर छुट्टी दे दी जाती है। ये निष्कर्ष इस दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।” हालांकि आम तौर पर सुरक्षित माने जाने वाले बीटा ब्लॉकर्स थकान, ब्रैडीकार्डिया (हृदय गति कम होना) और यौन रोग जैसे दुष्प्रभाव पैदा कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें- आखिर श्रीकृष्ण से पहले क्यों लिया जाता है राधा रानी का नाम, जानिए इसके पीछे का आध्यात्मिक कारण
बताया जाता है कि, यह स्टडी स्पेन और इटली के 109 अस्पतालों के 8,505 मरीजों को शामिल किया गया। प्रतिभागियों को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद बीटा ब्लॉकर्स लेने या न लेने के लिए उनकी इच्छा के अनुरूप चुना गया। बाकी सभी मरीजों को वर्तमान स्टैंडर्ड के अनुसार केयर दी गई और ऐसा लगभग चार वर्षों तक किया गया।परिणामों से दोनों समूहों के बीच मृत्यु दर, बार-बार दिल का दौरा पड़ने या हार्ट फेल्योर से अस्पताल में भर्ती होने की दर में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं दिखा।