वरात्रि व्रत के दौरान ध्यान और पूजा करता व्यक्ति (सौ. एआई)
Benefits of Navratri Fasting: भारत में नवरात्रि का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। अधिकांश लोग इन नौ दिनों में उपवास या व्रत रखते हैं। अक्सर इसे केवल धार्मिक आस्था और मां दुर्गा की भक्ति से जोड़कर देखा जाता है लेकिन प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद की मानें तो नवरात्रि में व्रत रखना शरीर को अंदर से रीसेट करने का एक शानदार वैज्ञानिक तरीका है।
ऋतु परिवर्तन के इस दौर में हमारा शरीर कई तरह के बदलावों से गुजरता है। आइए जानते हैं कि क्यों आयुर्वेद में नवरात्रि के दौरान व्रत रखने को अनिवार्य और स्वास्थ्यवर्धक माना गया है।
नवरात्रि साल में दो बार आती है एक चैत्र नवरात्रि (गर्मियों की शुरुआत) और दूसरी शरद नवरात्रि (सर्दियों की शुरुआत)। आयुर्वेद के अनुसार इन दोनों ही समय में मौसम तेजी से बदल रहा होता है। मौसम के इस बदलाव का सीधा असर हमारे शरीर के वात, पित्त और कफ दोषों पर पड़ता है। इस दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कमजोर हो जाती है और पाचन तंत्र सुस्त पड़ जाता है। व्रत के जरिए हल्का और सात्विक भोजन करने से इन दोषों को संतुलित करने में मदद मिलती है।
आयुर्वेद में पाचन शक्ति को अग्नि कहा गया है। जब हम रोज भारी, तला-भुना और मसालेदार भोजन करते हैं तो हमारी पाचन अग्नि मंद पड़ जाती है। व्रत रखने से पाचन तंत्र को आवश्यक विश्राम मिलता है। जब पेट खाली रहता है या हल्का भोजन (जैसे फल, कुट्टू या सेंधा नमक) प्राप्त करता है तो शरीर में जमा टॉक्सिन्स (जहरीले तत्व) बाहर निकलने लगते हैं और जठराग्नि दोबारा तीव्र होकर शरीर को ऊर्जावान बनाती है।
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव एक आम समस्या है। नवरात्रि के व्रत में केवल भोजन का त्याग ही नहीं, बल्कि संयम और ध्यान का भी महत्व है। सात्विक भोजन का सीधा संबंध हमारे मन से होता है। आयुर्वेद कहता है कि सात्विक आहार मन को शांत और एकाग्र बनाता है। यह एक तरह का मेंटल डिटॉक्स है जो हमें मानसिक रूप से स्थिर और संतुलित रहने में मदद करता है।
नवरात्रि के दौरान खाए जाने वाले खाद्य पदार्थ जैसे कुट्टू का आटा, सिंघाड़ा, साबूदाना, दही और मेवे न केवल पचने में आसान होते हैं बल्कि इनमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट होते हैं। ये भोजन शरीर को भारीपन महसूस कराए बिना जरूरी पोषण देते हैं। सेंधा नमक का प्रयोग ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने और पाचन को बेहतर बनाने में सहायक होता है।
नियमित रूप से अंतराल पर व्रत रखने से मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है। यह न केवल अतिरिक्त चर्बी घटाने में मदद करता है बल्कि शरीर की आंतरिक सफाई कर बीमारियों से लड़ने की शक्ति भी बढ़ाता है।
नवरात्रि का व्रत धर्म और विज्ञान का एक अद्भुत संगम है। यदि इसे सही तरीके से यानी संतुलित सात्विक आहार के साथ किया जाए तो यह आपके शरीर और मस्तिष्क दोनों के लिए एक नई ऊर्जा का स्रोत बन सकता है।