Chaitra Navratri के दूसरे दिन होगी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और मंत्र

Maa Brahmacharini: चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विधान है। इस दिन शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा और मंत्र जाप करने से मानसिक शांति, तप और संयम की शक्ति प्राप्त होती है।
Navratri Second Day Puja Vidh
मां ब्रह्मचारिणी (सौ.AI)
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Navratri Second Day Puja Vidhi: आज 20 मार्च को चैत्र नवरात्रि दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए समर्पित है। धार्मिक ग्रंथों में मां ब्रह्मचारिणी को साधना और संयम की प्रेरणा देने वाली देवी बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है।

मां ब्रह्मचारिणी: तप, संयम, ज्ञान और वैराग्य की देवी

ब्रह्मचारिणी मां की आराधना से तप, संयम, ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति होती है। माता को सफेद वस्त्र, चंदन, फूल और सफेद मिठाई चढ़ाने का विधान है। इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बना हुआ है।

‘ब्रह्म’ का अर्थ है तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ है आचरण करने वाली। मां का यह रूप हमें सिखाता है कि कठिन संघर्षों के समय भी अपने पथ से विचलित नहीं होना चाहिए।

इनकी उपासना करने से व्यक्ति के भीतर अटूट साहस और संयम आता है। यदि आपके व्यवसाय या जीवन के संचालन में बार-बार बाधाएं आने की आशंका बनी रहती है, तो मां ब्रह्मचारिणी की पूजा आपके आत्मविश्वास को नई दिशा देगी और आपकी बड़ी इच्छाएं पूरी करने का बल प्रदान करेगी।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का शुभ-मुहर्त

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए आज सुबह का समय शुभ माना गया है। 20 मार्च 2026 को सूर्योदय के बाद कभी भी पूजन किया जा सकता है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 तक रहेगा, जिसमें पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।

मां ब्रह्मचारिणी की सरल पूजन विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सफेद या पीले वस्त्र धारण करें, इससे मन में शुद्धता बनी रहती है।
  • मां की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं और कृतज्ञता व्यक्त करें।
  • मां को चमेली या कमल के फूल अर्पित करें, ये उन्हें प्रिय माने जाते हैं।
  • भोग में चीनी, मिश्री या पंचामृत अर्पित करें, इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है।
  • पूजन के दौरान मां के मंत्रों का जाप करें, जिससे नकारात्मकता दूर होती है।
  • अंत में आरती कर श्रद्धा से क्षमा याचना करें और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करें।

मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान मंत्र

या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

दधना करपद्याभ्यांक्षमालाकमण्डलू।

देवीप्रसीदतु मयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

इस मंत्र का मलतब है कि देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अद्भुत और दिव्य है। माता के दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएं हाथ में कमंडल रहता है।

माता ब्रह्मचारिणी की आराधना का मंत्र है ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नम: अर्थात जिन देवी का ओमकार स्वरूप है, उन सर्वोत्तमा देवी ब्रह्मचारिणी को हम सभी नमस्कार करते हैं।

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