एंकल मूवमेंट एक्सरसाइज (सौ. सोशल मीडिया)
Exercise For Ankle Stiffness: हर कोई रोजाना घर और ऑफिस में एक ही पोस्चर में बैठे रहते है इस वजह से शरीर के सभी अंगों पर प्रभाव पड़ता है। यहां पर एक ही पोस्चर में बैठे रहने से पीठ, कमर, कंधों और टखनों में जकड़न और दर्द की समस्या सबसे आम हो गई है। बुजुर्ग ही क्या युवा भी इन पोस्चर बिगड़ने की समस्या से परेशान होते नजर आते है। शरीर में लचीलापन और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने के लिए हम आपको सबसे सरल एंकल मूवमेंट एक्सरसाइज के बारे में बता रहे है। इस एक्सरसाइज को भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने बताया है।
आयुष मंत्रालय द्वारा सुझाए गए इस व्यायाम को मात्र 3-5 मिनट में किया जा सकता है। यह टखनों, पैरों में खून का बहाव बढ़ाता है, अकड़न दूर करता है और पूरे शरीर का बैलेंस बेहतर बनाता है। घर या ऑफिस में कुर्सी पर बैठे-बैठे भी इसे आसानी से किया जा सकता है। इसके अलावा इस एक्सरसाइज को करने से टखनों (एंकल) की आसान गतिविधियां की जाती है।
टखनों (एंकल) की आसान गतिविधियां मात्र कुछ मिनटों में फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाती हैं, ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती हैं और जोड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं। ये आसान टेक्नीक खासकर उन लोगों के लिए और भी फायदेमंद है, जो लंबे समय तक बैठे या खड़े रहते हैं।
अगर आप नियमित रूप से एंकल मूवमेंट एक्सरसाइज करते है तो आपके टखनों को फायदा मिलता है। टखनों की ये मूवमेंट्स अकड़न कम करती हैं, पैरों के जोड़ों को सही करती और पूरे शरीर का बैलेंस सुधारती है। नियमित अभ्यास से टखनों की रेंज ऑफ मोशन बढ़ती है, जिससे चलना-फिरना आसान होता है, गिरने का खतरा कम होता है और रोजमर्रा के कामों में सुविधा मिलती है।
आप एंकल मूवमेंट एक्सरसाइज को रोजाना अपनी आदत में शामिल कर सकते है। इस व्यायाम को खड़े होकर आसानी से किया जा सकता है। इसके लिए दोनों पैरों को एक साथ जोड़कर सीधे खड़े हो जाएं। शरीर को संतुलित रखें और हाथों को कमर पर या साइड में रखें। दाएं पैर को थोड़ा आगे की ओर खींचें और जमीन से लगभग 9 इंच (लगभग 22-25 सेमी) ऊपर उठाएं। पैर को हल्के से ऊपर-नीचे (पॉइंट और फ्लेक्स) करें, फिर दाएं-बाएं घुमाएं। इसके बाद पैर को गोल-गोल घुमाएं। पहले क्लॉकवाइज फिर एंटी-क्लॉकवाइज में 5-10 बार करें। इस दौरान गति धीमी और नियंत्रित रखें। इस तरीके से आप 3-5 मिनट के लिए एंकल मूवमेंट की एक्सरसाइज कर सकते है। इसे सुबह उठते ही या दिन में कभी भी कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें- सर्दियों में भूलकर भी ना करें आप इन 5 चीजों का सेवन, शरीर को कर सकती है बीमार
शुरुआत में अगर संतुलन में दिक्कत हो तो दीवार या कुर्सी का सहारा लें। इससे टखनों और पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। रक्त संचार बढ़ने से पैरों में थकान और सूजन कम होती है। जोड़ों की लचीलापन बढ़ती है, जिससे घुटनों और कूल्हों पर भी कम दबाव पड़ता है। बैलेंस बेहतर होने से बुजुर्गों में गिरने का जोखिम घटता है।