2050 तक 3.9 करोड़ मौतें… क्या AI की खोज से बचेंगी लाखों जिंदगियां? बैक्टीरिया के खिलाफ दवाएं तैयार
Health News in Hindi: वैज्ञानिकों ने पाया है कि कई मामलों में पुरानी एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरिया पर असर नहीं करतीं। इसकी वजह से हर साल दुनिया भर में 10 लाख से ज्यादा लोगों की जान चली जाती है।
- Written By: अमन उपाध्याय
एआई तस्वीर
AI Developed Antibiotics: वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से नई दवाएं विकसित की हैं, जो उन खतरनाक बैक्टीरिया को खत्म करने में सक्षम हैं जिन पर पुरानी दवाएं असर करना बंद कर चुकी थीं। इन दवाओं से भविष्य में लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है।
अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के शोधकर्ताओं ने इन्हें तैयार किया है। खास बात यह है कि ये दवाएं न तो पहले कभी प्रकृति में पाई गई थीं और न ही किसी प्रयोगशाला में बनाई गई थीं। इस शोध को जर्नल सेल में प्रकाशित किया गया है।
हर साल दुनिया भर में 10 लाख से ज्यादे लोगों की मौत
वैज्ञानिकों ने पाया कि बैक्टीरिया पर काम करने वाली पुरानी एंटीबायोटिक्स अब कई बार असर नहीं करती हैं। इसे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कहते हैं। ये दवाएं काम करना बंद कर देती हैं। इसके कारण हर साल दुनिया भर में 10 लाख से ज्यादा लोग की मृत्यु हो जाती है। अगर नई दवाएं नहीं बनीं, तो साल 2050 तक करीब 3.9 करोड़ मौतें हो सकती हैं।
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वैज्ञानिकों ने पाया है कि कई बार पुराने एंटीबायोटिक बैक्टीरिया पर असर नहीं करते। इस स्थिति को एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कहा जाता है, जिसमें दवाएं बेअसर हो जाती हैं। इसके चलते हर साल दुनिया भर में 10 लाख से ज्यादा लोगों की जान चली जाती है। अगर समय रहते नई दवाएं विकसित नहीं की गईं, तो अनुमान है कि वर्ष 2050 तक यह संख्या बढ़कर करीब 3.9 करोड़ मौतों तक पहुंच सकती है।
इस तरह किया गया तैयार
वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से 4.5 करोड़ से ज्यादा रासायनिक अणुओं का अध्ययन किया। जिस तरह चैटजीपीटी शब्दों के पैटर्न समझता है, उसी तरह यह एआई अणुओं के पैटर्न को पहचानकर नए संयोजन तैयार करता है। इनसे ऐसे यौगिक बने हैं जो खतरनाक बैक्टीरिया को खत्म कर सकते हैं और इंसानों के लिए भी सुरक्षित माने जा रहे हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि फिलहाल ये दवाएं केवल जानवरों और लैब में सफल रही हैं। इंसानों पर उपयोग से पहले और परीक्षण बाकी हैं। चूंकि दवा बनाने की प्रक्रिया बेहद महंगी और समय लेने वाली है, इसलिए इन्हें मरीजों तक पहुंचने में अभी देर लगेगी।
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इन दवाओं को तैयार करने में मिली बड़ी उपलब्धि
1. एनजी1: यह दवा खतरनाक बैक्टीरिया गोनोरिया पर कारगर साबित हुई है। गोनोरिया कई दवाओं से अब तक बच निकलता था, लेकिन एनजी1 सीधे उस प्रोटीन (LptA) पर वार करती है, जो बैक्टीरिया को सुरक्षा परत बनाने में मदद करता है। खास बात यह है कि इस दवा के खिलाफ बैक्टीरिया आसानी से प्रतिरोधक क्षमता (रेजिस्टेंस) विकसित नहीं कर पा रहा।
2. ईएन1: यह नई दवा अस्पतालों में फैलने वाले खतरनाक एमआरएसए संक्रमण पर प्रभावी साबित हुई है। यह बैक्टीरिया को नष्ट करती है, लेकिन मानव कोशिकाओं को कोई हानि नहीं पहुंचाती। जेम्स कॉलिन्स, वैज्ञानिक, एमआईट
