

नई दिल्लीः हरियाणा विधानसभा चुनावों में हार बाद कांग्रेस में भगदड़ के आसार दिख रहे हैं। AICC ओबीसी चेयरमैन व पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव ने सभी दायित्वों व पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भेज दिया है।
आज सुबह कैप्टन यादव की मुलाकात कांग्रेस नेता राहुल गांधी हुई थी। इसके बाद उन्होंने इस्तीफा देकर सबको चौका दिया। बता दें कैप्टन अजय यादव बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के समधी हैं। वह कांग्रेस में इकलौते अहिरवाल बेल्ट के बड़े नेता थे।
इस्तीफे के बाद इमोशनल हुए कैप्टन अजय यादव
कैप्टन अजय यादव ने कांग्रेस अध्यक्ष को इस्तीफा देने के बाद सोशल मीडिया पर एक इमोशनल पोस्ट की। उन्होंने लिखा कि "इस्तीफा देने का यह निर्णय वास्तव में कठिन था, क्योंकि मेरे परिवार का 70 वर्षों से जुड़ाव था, मेरे पिता स्वर्गीय राव अभय सिंह 1952 में विधायक बने और उसके बाद मैंने पारिवारिक परंपरा को जारी रखा, लेकिन सोनिया गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटने के बाद मेरे साथ खराब व्यवहार करने के लिए पार्टी हाईकमान से मोहभंग हो गया है।"
बेटे की हार और टिकट वितरण में हुड्डा की मनमानी से नाराज थे कैप्टन यादव
बता दें कि एक-एक करके अहिरवाल बेल्ट के दो दिग्गज नेताओं ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया। इससे पहले 2019 में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत कांग्रेस छोड़कर भाजपा में चले गए थे। अब कैप्टन अजय यादव का विकेट भी गिर गया है। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही अंदाजा लगाया जा रहा था कि कैप्टन कांग्रेस छोड़ सकते हैं। इसका कारण टिकट वितरण में भूपेंद्र हुड्डा की मनमानी और अहिरवाल बेल्ट की रेवाड़ी विधानसभा से पुत्र चिरंजीव राव हार की हार को माना जा रहा है। चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेसी खेमें निराशा थी तो वहीं कुछ कांग्रेस नेता आक्रोशित थे। जिसमें कैप्टन यादव का भी नाम है। उन्होंने चुनाव परिणाम के बाद सोशल हैंडल से कांग्रेस में अहिरवाल बेल्ट को उचित प्रतिनिधित्व न मिलने को लेकर भी ट्वीट किया था।
कांग्रेस में अहिरवाल बेल्ट के प्रतिनिधित्व का उठाया था मुद्दा
विधानसभा चुनाव परिणाम के एक दिन बाद राहुल गांधी को टैग करते हुए कैप्टन ने लिखा था कि "पार्टी को दक्षिणी हरियाणा खासकर गुरुग्राम, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और फरीदाबाद में अपनी विफलता के लिए आत्मचिंतन करना चाहिए, जहां उसे सिर्फ 1 सीट मिली। अहीरवाल का कांग्रेस कार्यसमिति, मुख्य चुनाव समिति, एआईसीसी महासचिव और यहां तक कि हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी में भी कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। @राहुल गांधी एआईसीसी ओबीसी के अध्यक्ष दिखावटी और दंतहीन हैं"