पाक की भाषा बोलने के आरोपी प्रोफेसर पर NHRC का एक्शन, सुप्रीम कोर्ट से जमानत के बाद हरियाणा DGP को नोटिस
कोर्ट ने प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की पोस्ट में इस्तेमाल किए शब्द दूसरों के लिए अपमानजनक और असहज करने वाले बताए। कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सभी को लेकिन इनका बयान कानून की नजर में डॉग व्हिसलिंग कहलाता है।
- Written By: सौरभ शर्मा
अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद (फोटो- सोशल मीडिया)
चण्डीगढ़: हरियाणा की अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की गिरफ्तारी अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के निशाने पर आ गई है। ऑपरेशन सिंदूर पर सोशल मीडिया टिप्पणी के चलते गिरफ्तार किए गए प्रोफेसर को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है, जिससे यूनिवर्सिटी और उनके परिवार ने राहत की सांस ली है। लेकिन इस प्रकरण में नया मोड़ तब आया जब NHRC ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए हरियाणा पुलिस के DGP को नोटिस जारी कर एक हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट देने की बात कही है। आयोग ने इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला माना है।
प्रोफेसर के द्वारा जिस तरह के शब्दों का उपयोग कर आलोचना की गई उस पर कोर्ट ने कहा कि वह विद्वान हैं और उनके पास शब्दों की कोई कमी नहीं है। एसोसिएट प्रोफेसर को ऑपरेशन सिंदूर पर टिप्पणी करने के लिए 18 मई को गिरफ्तार किया गया था। उन पर भारत की संप्रभुता और अखंडता को खतरे में डालने का भी आरोप था। 18 मई को गिरफ्तारी के बाद उन्हें सोनीपत कोर्ट में पेश किया गया था।
मानवाधिकार आयोग ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर इस मामले में खुद से ही संज्ञान लिया है। आयोग का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि प्रोफेसर के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। आयोग ने हरियाणा के DGP को नोटिस भेजते हुए स्पष्ट किया है कि प्रोफेसर की गिरफ्तारी और हिरासत में लेने के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे पहले यूनिवर्सिटी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए इसे न्याय की ओर पहला कदम बताया है।
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सुप्रीम कोर्ट से राहत, यूनिवर्सिटी ने जताई संतुष्टि
प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी है। गिरफ्तारी के बाद उन्होंने अपनी याचिका में बताया कि उन्होंने कोई आपत्तिजनक या देश विरोधी टिप्पणी नहीं की थी। कोर्ट के इस फैसले के बाद यूनिवर्सिटी ने भी सार्वजनिक बयान जारी कर कहा कि प्रोफेसर को राहत मिलने से यूनिवर्सिटी, छात्रों और उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है। यूनिवर्सिटी ने न्याय प्रक्रिया पर भरोसा जताया है।
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NHRC का हस्तक्षेप, पुलिस कार्रवाई पर सवाल
20 मई की एक मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हरियाणा के डीजीपी को नोटिस जारी किया है। आयोग का कहना है कि सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर हुई गिरफ्तारी में नागरिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी के हनन की आशंका है। NHRC ने हरियाणा पुलिस से एक सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि अधिकारों का उल्लंघन पाया गया तो आगे की सख्त कार्रवाई हो सकती है।
