Thalapathy Vijay की इन 7 फिल्मों ने बदली साउथ सिनेमा की दिशा, सिस्टम पर तीखे प्रहार से बने जन नेता
Thalapathy Vijay Career: थलापति विजय ने अपनी फिल्मों के जरिए सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, बल्कि राजनीति की खामियों जैसे मुद्दों को भी उठाया। मर्सल, सरकार और कठ्ठी जैसी फिल्मों ने उन्हें सुपरस्टार बनाया।
- Written By: सोनाली झा
थलापति विजय (फोटो-सोशल मीडिया)
Thalapathy Vijay Top Movies: साउथ सिनेमा के दिग्गज अभिनेता थलापति विजय आज सिर्फ एक स्टार नहीं, बल्कि एक मजबूत सामाजिक और राजनीतिक आवाज बन चुके हैं। उनकी फिल्मों ने मनोरंजन के साथ-साथ समाज के ज्वलंत मुद्दों को भी बड़े पर्दे पर प्रभावशाली ढंग से उठाया है। यही वजह है कि उनकी फैन फॉलोइंग लगातार बढ़ती गई और अब वह राजनीति में भी सक्रिय हो चुके हैं। उनकी आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ से पहले आइए जानते हैं उन फिल्मों के बारे में, जिन्होंने उन्हें ‘जनता का हीरो’ बनाया।
सरकार और मर्सल
साल 2018 में रिलीज हुई ‘सरकार’ एक पॉलिटिकल ड्रामा थी, जिसमें विजय ने एक कॉर्पोरेट प्रोफेशनल का किरदार निभाया। फिल्म में चुनावी गड़बड़ियों और वोटिंग सिस्टम की खामियों को उजागर किया गया। इस फिल्म ने दर्शकों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया। साल 2017 की फिल्म ‘मर्सल’ में विजय ने डबल रोल निभाया। फिल्म ने स्वास्थ्य सेवाओं की महंगाई और असमानता जैसे मुद्दों को उठाया। इसने समाज में मौजूद खामियों पर सवाल खड़े किए और दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया।
थुप्पक्की और कठ्ठी
साल 2012 में आई ‘थुप्पक्की’ एक एक्शन थ्रिलर होने के बावजूद राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक जिम्मेदारी का मजबूत संदेश देती है। विजय का आर्मी ऑफिसर वाला किरदार दर्शकों को बेहद पसंद आया। कठ्ठी (2014) को विजय की सबसे प्रभावशाली फिल्मों में गिना जाता है। फिल्म में किसानों की समस्याएं, पानी का संकट और कॉर्पोरेट शोषण जैसे मुद्दों को उठाया गया। यह फिल्म आज भी सामाजिक सिनेमा का बेहतरीन उदाहरण मानी जाती है।
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मास्टर और बिगिल
2021 में आई ‘मास्टर’ में विजय ने एक शिक्षक का रोल निभाया। फिल्म में युवाओं के भटकाव और अपराध की दुनिया में जाने के पीछे सिस्टम की कमजोरियों को दिखाया गया। 2019 की ‘बिगिल’ सिर्फ एक स्पोर्ट्स फिल्म नहीं थी, बल्कि महिलाओं के संघर्ष और उनके सशक्तिकरण की कहानी थी। फिल्म ने समाज में महिलाओं की स्थिति पर जोरदार संदेश दिया।
थलाइवा
थलाइवा (2013) में विजय ने एक आम आदमी से नेता बनने का सफर दिखाया। फिल्म ने राजनीति और नेतृत्व के कई पहलुओं को उजागर किया। थलापति विजय की फिल्मों की खासियत यह है कि वे सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि समाज को आईना दिखाती हैं। यही वजह है कि उनके किरदार आम जनता से जुड़ते हैं और उन्हें एक ‘जन नेता’ की छवि देते हैं। अब जब वह राजनीति में कदम रख चुके हैं, तो उनकी फिल्मों का प्रभाव और भी ज्यादा मायने रखता है।
