Suchitra Sen Career: सुचित्रा सेन ने करियर के शिखर पर छोड़ी फिल्में, गुमनामी को चुना अपना रास्ता
Dadasaheb Phalke Award Refusal: सुचित्रा सेन ने सुपरस्टार बनने के बाद गुमनामी की जिंदगी चुनी और 36 साल तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहीं। उन्होंने दादा साहब फाल्के पुरस्कार लेने से भी इनकार कर दिया।
- Written By: सोनाली झा
सुचित्रा सेन (फोटो- सोशल मीडिया)
Suchitra Sen Birth Anniversary Special Story: भारतीय सिनेमा की दिग्गज अदाकारा सुचित्रा सेन का नाम आज भी सम्मान के साथ लिया जाता है। 6 अप्रैल 1931 को जन्मी सुचित्रा सेन का असली नाम रोमा दास गुप्ता था। एक साधारण परिवार में पली-बढ़ीं सुचित्रा को बचपन से ही अभिनय और संगीत का शौक था। शादी के बाद उनके पति ने ही उन्हें फिल्मों में आने के लिए प्रेरित किया, जिसके बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा।
सुचित्रा सेन ने अपने करियर की शुरुआत बंगाली फिल्मों से की। उनकी पहली रिलीज फिल्म ‘चौत्तोर’ थी, जिसमें उन्होंने उत्तम कुमार के साथ काम किया। यह जोड़ी इतनी लोकप्रिय हुई कि दोनों ने साथ मिलकर कई हिट फिल्में दीं और करीब दो दशकों तक पर्दे पर राज किया। बाद में उन्होंने हिंदी सिनेमा में भी अपनी पहचान बनाई। ‘देवदास’, ‘ममता’ और ‘आंधी’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया।
सुचित्रा सेन का करियर
सुचित्रा सेन फिल्म आंधी के किरदार ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। उनकी आंखों की भाषा और भावनाओं से भरी एक्टिंग उन्हें बाकी अभिनेत्रियों से अलग बनाती थी। अपने करियर के चरम पर सुचित्रा सेन ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने सभी को चौंका दिया। 1978 में फिल्म ‘प्रणय पाशा’ की असफलता के बाद उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को पूरी तरह सार्वजनिक जीवन से अलग कर लिया और गुमनामी में जीने का रास्ता चुन लिया।
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36 साल तक दुनिया से दूरी
सुचित्रा सेन ने लगभग 36 साल तक किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने मीडिया और फैंस से दूरी बनाए रखी और एकांत जीवन बिताया। उनकी यह रहस्यमयी जिंदगी लोगों के बीच हमेशा चर्चा का विषय बनी रही। साल 2005 में सुचित्रा सेन को भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान दादासाहेब अवॉर्ड से नवाजने का फैसला किया गया। लेकिन उन्होंने यह सम्मान लेने से इनकार कर दिया, क्योंकि वे सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आना चाहती थीं।
आखिरी इच्छा भी रही अनोखी
17 जनवरी 2014 को उनका निधन हो गया। उनकी अंतिम इच्छा भी बेहद खास थी। वे नहीं चाहती थीं कि उनके निधन के बाद भी उनका चेहरा सार्वजनिक किया जाए। उनके परिवार ने उनकी इस इच्छा का सम्मान किया। सुचित्रा सेन की जिंदगी सिर्फ सफलता की कहानी नहीं, बल्कि अपने फैसलों पर अडिग रहने और निजी जीवन को प्राथमिकता देने की मिसाल भी है।
