अस्पताल से रिलीज हुआ था शारदा सिन्हा का आखिरी गीत, ‘दुखवा मिटाईं छठी मैया..रउए असरा हमार’
बिहार की कोकिला कहीं जाने वाली लोक गायिका शारदा सिन्हा का 72 साल की उम्र में निधन हुआ है। वह दिल्ली के एम्स में भर्ती थी और अस्पताल में भर्ती रहते हुए उन्होंने एक गीत गाया था। जो अब उनके जीवन का आखिरी गीत बन गया है।
- Written By: अनिल सिंह
मुंबई: शारदा सिन्हा का निधन 72 साल की उम्र में हुआ। लोकप्रिय लोक गायिका शारदा सिन्हा ने दिल्ली के एम्स में आखिरी सांस ली। जहां मायलोमा नाम की बीमारी के लिए उनका इलाज चल रहा था। बीमारी के दौरान शारदा सिन्हा ने अस्पताल से ही एक गीत गाया था, जो अब उनका आखिरी गीत साबित हुआ। छठी मैया के उस गीत को अब लोग सुन रहे हैं। गीत है, ‘दुखवा मिटाईं छठी मैया…रउए असरा हमार…’, यह शारदा सिन्हा के जीवन का आखिरी गीत बन गया। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि शारदा सिन्हा उन कलाकारों में शामिल हो गई है जिन्होंने मरते दम तक काम किया, यह काम के प्रति उनके जुनून और जज्बे को दर्शाता है।
शारदा सिन्हा के निधन के बाद भोजपुरी इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। शारदा सिन्हा ने छठ माता के लिए ढेर सारे गाने गए और छठ पर्व पर खासतौर पर शारदा सिन्हा की आवाज की गूंज पूरे देश भर में गूंजती है। भले ही शारदा सिन्हा बिहार की लोकप्रिय गायिका रही हों, लेकिन उन्हें पूरे देश भर में सम्मान प्राप्त था। उन्हें पद्म श्री और पद्म विभूषण से नवाजा जा चुका है।
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शारदा सिन्हा के निधन पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत कई राजनेताओं ने दुख जताया है। नरेंद्र मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा सुप्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ। उनके गाए मैथिली और भोजपुरी के लोकगीत पिछले कई दशकों से बेहद लोकप्रिय हैं। आस्था के पर्व छठ से जुड़े उनके सुमधुर गीतों की गूंज भी सदैव बनी रहेगी। नरेंद्र मोदी ने इन वाक्यों के साथ शारदा सिन्हा और अपनी तस्वीर पोस्ट में साझा की है। शारदा सिन्हा के निधन पर यह कहा जा सकता है कि देश ने आज एक और अनमोल रतन को खो दिया है। जिसकी भरपाई आने वाले समय में होना मुश्किल है।
