सईद जाफरी (सोर्स -सोशल मीडिया)
Saeed Jaffrey Birth Anniversary Sepcial Story: हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता सईद जाफरी का फिल्मी करियर जितना बुलंद रहा, निजी जीवन उतना ही उलझनों और पछतावे से भरा रहा। आज जब किसी भारतीय अभिनेता का हॉलीवुड में काम करना बड़ी उपलब्धि माना जाता है, तब सईद जाफरी ने यह मुकाम 60 के दशक में ही हासिल कर लिया था।
8 जनवरी 1929 को जन्मे सईद जाफरी को बचपन से ही अभिनय में रुचि थी। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत फिल्मों से नहीं, बल्कि ऑल इंडिया रेडियो में इंग्लिश अनाउंसर के रूप में की थी। उनकी आवाज और बोलने का अंदाज लोगों को बेहद प्रभावित करता था। इसके बाद उन्होंने थिएटर का रुख किया और साल 1951 में ‘यूनिटी थिएटर’ की स्थापना की, जहां से उनके अभिनय सफर को नई दिशा मिली।
फिल्मी दुनिया में सईद जाफरी ने लगभग छह दशक तक काम किया और 150 से ज्यादा फिल्मों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया। हिंदी सिनेमा में ‘शतरंज के खिलाड़ी’, ‘चश्मे-बद्दूर’, ‘मासूम’, ‘दिल’, ‘हिना’ और ‘राम तेरी गंगा मैली’ जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी याद किए जाते हैं। खासतौर पर राज कपूर की फिल्मों ने उन्हें घरेलू दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया।
सईद जाफरी की खास पहचान यह भी रही कि उन्होंने हॉलीवुड और ब्रिटिश सिनेमा में भी दमदार भूमिकाएं निभाईं। ‘द मैन हू वुड बी किंग’, ‘अ पैसेज टू इंडिया’, ‘स्फिंक्स’ और ‘गांधी’ जैसी अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में उनके अभिनय को काफी सराहा गया। वह ब्रिटिश और कनाडाई फिल्म अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट होने वाले पहले एशियाई अभिनेता भी बने, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी।
हालांकि, पर्दे पर इतनी कामयाबी के बावजूद उनका निजी जीवन संघर्षों से भरा रहा। उनकी पहली शादी अभिनेत्री और लेखिका मधुर जाफरी से हुई थी, लेकिन आपसी मतभेदों के चलते यह रिश्ता टूट गया। इस शादी से उनकी तीन बेटियां हुईं, लेकिन तलाक के बाद वे उनसे दूर हो गए। बाद के वर्षों में सईद जाफरी ने कई बार स्वीकार किया कि करियर की दौड़ में उन्होंने अपने रिश्तों को नजरअंदाज किया, जिसका उन्हें जीवनभर अफसोस रहा।