बॉलीवुड गाने नहीं कमा रहे पैसा! भोजपुरी-पंजाबी जैसे क्षेत्रीय गानों पर पैसा लगा रही कंपनियां, देखें रिपोर्ट
Consolidation in Indian Music Industry में मंदी के बीच बड़ी कंपनियां पंजाबी और हरियाणवी जैसे क्षेत्रीय गानों पर दांव लगा रही हैं, जिससे छोटे लेबल्स को नया विस्तार मिलेगा।
- Written By: अक्षय साहू
सांकेतिक तस्वीर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Regional Songs Acquisition: भारत में सब्सक्रिप्शन मॉडल और विज्ञापन से होने वाली कमाई की रफ्तार धीमी पड़ गई है। ऐसे में म्यूजिक कंपनियों का क्षेत्रीय गानों में एक बड़ा बाजार दिखाई दे रहा है और वो पंजाबी, भोजपुरी, हरियाणावी जैसे अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के गानों पर दांव लगा रही है। यही कारण है कि टाइम्स म्यूजिक, वार्नर म्यूजिक और सारेगामा जैसी बड़ी कंपनियों क्षेत्रीय गानों पर अपना पैसा लगा रही है।
फिक्की ईवाई रिपोर्ट 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, इन कंपनियों ने हाल ही में क्षेत्रीय कैटलॉग का अधिग्रहण किया है। जानकारों का मानना है कि इस तरह की स्थिति से न केवल स्थापित खिलाड़ियों बल्कि छोटी कंपनियों के लिए भी फायदेमंद होता है। जानकारों के मुताबिक इस तरह से भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री के एकीकरण से बड़ी कंपनियों को संसाधनों को एकत्रित करने के साथ अपना कैटलॉग को मजबूत करने और विज्ञापन देने वाली कंपनियो और ब्रांडों के साथ मोलभाव को बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही यह साझा मार्केटिंग, तकनीक को अपनाने और डेटा-संचालित करने की रणनीतियों तक पहुंच को सक्षम बनाता है।
बड़ी कंपनियों के साथ छोटी कंपनियों को भी फादया
एकीकरण से बड़ी कंपनियों को मिलने वाले फायदों की बात करें तो, यह कैटलॉग बेहतर लाइसेंसिंग का मौका देता है, बड़े डील के लिए अट्रैक्ट करता है, इसके अलावा अलग-अलग संगीत को खोजता और उसमे सुधार करता है। क्योंकि कंटेंट को लेकर बढ़ती लागत एक बड़ी समस्या बनती जा रही है और खुद के दम पर कंटेंट बनना एक मुस्किल काम हो गया है। बड़ी कंपनियां इस तरह से फाइनेंस की समस्याओं को दूर करते हुए बेहतर कंटेंट उपलब्ध करा सकती हैं।
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जबकि, दूसरी तरफ छोटी कंपनियों को इससे अधिकार और रॉयल्टी सिस्टम को सुव्यवस्थित करके, डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन के विस्तार को बढ़ावा मिलता है। साथ ही कम उपयोग किए गए कैटलॉग को उनकी सांस्कृतिक पहचान के साथ स्ट्रीमिंग के मुख्य प्लेटफॉर्म तक पहुंचाकर अच्छी कमाई करने का मौका मिलता है। इसके तहत छोटी कंपनियां और लेबल जो कमाई के लिए स्ट्रीमिंग और यूट्यूब से मिलने वाले रेवेन्यू पर निर्भर है। उन्हें पैसे खत्म होने से पहले ही अपने कैटलॉग से फायदा मिलने लगता है।
एकीकरण होने का नुकसान
म्यूजिक इंडस्ट्री के एकीकरण से जहां छोटी और बड़ी दोनों तरह की कंपनियों को फायदा होगा। वहीं, इसके कुछ नुकसान भी हैं। जैसे क्षेत्रीय बाजारों में बड़े खिलाड़ियों के आने से एकाधिकार की समस्य खड़ी हो सकती है। जिससे अल्पकालिक लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा लागत और वसूसी के स्ट्रक्चर को समझे बिना ऐसे क्षेत्रों में घुसना अक्सर व्यावसायिक रूप से अस्थिर परियोजनाओं का परिणाम हो सकता है।
लगातार बढ़ रही भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री
| वर्ष | राजस्व (करोड़ रुपये में) |
|---|---|
| 2023 | 5400 |
| 2024 | 5300 |
| 2025 | 5900 |
| 2026* | 6400 |
| 2028* | 7500 |
म्यूजिक इंडस्ट्री में कई चुनौतियां
इन सबके अलावा आज म्यूजिक लेबल अपने अधिकारों से अधिक पैसे हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। म्यूजिक कंपनियां अक्सर उतनी कमाई नहीं कर पाते हैं जितनी उन्होंने साउंडट्रैक खरीदने के खर्च किया होता है। खास तौर पर हिंदी फिल्मों के एल्बम के लिए। ऑडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफार्मों जैसे गाना.कॉम, जियो सावन और यूट्यूब म्यूजिक ने पिछले एक साल में सब्सक्रिप्शन की कीमतों को लगभग आधा कर दिया है। क्योंकि दर्शक अब यूट्यूब गानों की जगह स्टैंड-अप कॉमेडी और पॉडकास्ट पर शिफ्ट हो गए हैं।
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बढ़ सकता है क्षेत्रीय गानों को खरीदने का बिजनेस
फिक्की ईवाई की रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्रीय गानों को खरीदने का यह सिलसिला आने वाले समय में और बढ़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार ऐसा या तो कमाई बढ़ाने के लिए किए जाएगा या फिर नए फिल्म म्यूजिक के राइट्स खरीदने में लगने वाले बढ़ते लागत से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए।
