Govinda: जब मुंबई की लोकल ट्रेन से गिर गए थे गोविंदा, घबराकर चिल्लाने लगी थी अभिनेता की मां
Train Accident: गोविंदा ने लोकल ट्रेन का किस्सा सुनाया। एक बार भीड़ में गिरने पर उनकी मां 'मेरा बच्चा!' कहकर चिल्लाने लगी थीं। उन्होंने कहा कि भले ही वह जवान थे, पर मां के लिए हमेशा बच्चे रहेंगे।
- Written By: अनिल सिंह
Govinda (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Govinda Train Accident: बॉलीवुड के ‘हीरो नंबर 1’ गोविंदा ने इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए कड़ी मेहनत और संघर्षों को झेला है। एक पुराने इंटरव्यू में गोविंदा ने अपने शुरुआती दिनों का एक मजेदार और भावुक किस्सा साझा किया, जो मुंबई की लोकल ट्रेन से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि कैसे आम आदमी की तरह सफर करते हुए उन्होंने मुंबई की असली जिंदगी को करीब से देखा और महसूस किया।
लहरें टीवी को दिए गए एक इंटरव्यू में गोविंदा ने कहा कि अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने आम लोगों की तरह लोकल ट्रेन में सफर किया था, क्योंकि यह ‘मुंबई शहर की धड़कन’ है।
लोकल ट्रेन में बिगड़ा संतुलन, गिर पड़े थे गोविंदा
गोविंदा ने उस वाकये को याद करते हुए बताया कि एक बार वह पहली बार चर्चगेट गए थे और भीड़ भरी ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहे थे।
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गोविंदा की उम्र: उस वक्त उनकी उम्र लगभग 18 या 19 साल की होगी, और वह काफी फिट और ताकतवर हुआ करते थे, क्योंकि उन्हें फुटबॉल खेलने और कसरत करने का शौक था।
मां थीं साथ: पहले वह अपने भाइयों के साथ वहाँ गए और बाद में अपनी मां को भी साथ लेकर गए।
हादसा: गोविंदा ने बताया, “लोकल ट्रेन की भीड़ इतनी ज्यादा थी कि ट्रेन में चढ़ते वक्त मेरा संतुलन बिगड़ गया और मैं गिर पड़ा।” गोविंदा के लिए यह सामान्य था, लेकिन उनकी मां के लिए यह बेहद डरावना था।
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‘मेरा बच्चा! मेरा बच्चा!’ सुनकर घबरा गए थे लोग
जैसे ही गोविंदा ट्रेन से नीचे गिरे, उनकी मां घबरा गईं और मदद के लिए ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगीं।
मां का रिएक्शन: गोविंदा ने बताया, “मेरी मां घबरा गईं और मदद के लिए जोर-जोर से चिल्लाने लगीं, ‘मेरा बच्चा! मेरा बच्चा!'”
लोगों की प्रतिक्रिया: यह सुनकर स्टेशन पर मौजूद लोग घबरा गए और इधर-उधर देखने लगे। उन्हें लगा कि कोई छोटा बच्चा खो गया है। गोविंदा ने हँसते हुए कहा कि जब लोगों ने पीछे मुड़कर देखा, तो पाया कि गिरने वाला कोई छोटा बच्चा नहीं, बल्कि एक लंबा-चौड़ा, मजबूत जवान लड़का है।
भावुक बात: गोविंदा ने मुस्कुराते हुए कहा, “भले ही मैं जवान था, लेकिन मैं मां के लिए हमेशा उनका छोटा बच्चा ही रहूंगा।”
संघर्ष और अभिनय करियर की शुरुआत
गोविंदा ने अपने शुरुआती जीवन के सफर के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि वह 21 साल तक विरार में रहे। उनकी मां उनसे घर का काम करवाती थीं और वह बिना शिकायत के आज्ञाकारी बच्चे की तरह हर काम करते थे। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह अभिनेता बनेंगे, लेकिन किस्मत ने उनका साथ दिया।
करियर ब्रेक: गोविंदा ने बताया, “जब मैं मुंबई आया, तो यहां संघर्ष शुरू हुआ। लेकिन किस्मत ने मेरा साथ दिया और महज दो से तीन महीनों के भीतर ही मुझे पहली फिल्म मिल गई। यहीं से मेरे अभिनय करियर की शुरुआत हुई।”
खूबसूरत मोड़: गोविंदा ने कहा कि आज इतने सालों बाद भी जब वह अपने शुरुआती संघर्ष और लोकल ट्रेन के उन दिनों को याद करते हैं, तो वह दौर उन्हें अपने जीवन का सबसे खूबसूरत मोड़ लगता है।
