मनोज बाजपेयी और नीरज पांडे (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया)
Manoj Bajpayee And Neeraj Pandey Effigies Burnt: ओटीटी प्रोजेक्ट ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर छिड़ा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। जहां एक ओर फिल्म के डायरेक्टर और टीम के खिलाफ उत्तर प्रदेश के हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर देश के कई हिस्सों में ब्राह्मण समाज के विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करते हुए नेटफ्लिक्स से फिल्म का टीजर और पूरा प्रमोशनल कंटेंट हटवाना पड़ा।
‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को प्रयागराज के सुभाष चौक पर प्रदर्शनकारियों ने फिल्म के प्रोड्यूसर नीरज पांडे, लीड एक्टर मनोज बाजपेयी और डायरेक्टर रितेश शाह के पुतले जलाए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने नेटफ्लिक्स पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की।
वहीं, इंदौर में भी ब्राह्मण समुदाय के लोगों ने प्रदर्शन करते हुए नेटफ्लिक्स और मनोज बाजपेयी के पुतले जलाए। परशुराम सेना के सदस्यों ने चेतावनी दी कि अगर फिल्म पर रोक नहीं लगी तो वे कड़े कदम उठाएंगे।
#WATCH | Indore, Madhya Pradesh: Brahmin community protests against Netflix’s upcoming film ‘Ghooskhor Pandat’ in Indore. pic.twitter.com/qlUsni0aj3 — ANI (@ANI) February 6, 2026
दरअसल, ‘घूसखोर पंडत’ में मनोज बाजपेयी ने अजय दीक्षित नाम के एक पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई है। कहानी के अनुसार, यह किरदार भ्रष्ट है और अपने कामों की वजह से बदनाम हो चुका है। इसी कारण लोग उसे ‘घूसखोर पंडत’ कहकर बुलाते हैं।
हालांकि, फिल्म के मेकर्स का कहना है कि यह किरदार किसी भी समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं करता, लेकिन ‘पंडत’ शब्द के साथ ‘घूसखोर’ जोड़े जाने पर ब्राह्मण समुदाय ने कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि इससे पूरे समाज की छवि को नुकसान पहुंचता है और सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है।
इस फिल्म के टाइटल को लेकर विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया से हुई थी, जो बाद में भोपाल, मेरठ और प्रयागराज जैसे शहरों में सड़कों तक पहुंच गया। मेरठ फिल्म सोसाइटी ने भी मेकर्स को लीगल नोटिस भेजा है। वहीं, मुंबई में एक वकील ने टाइटल बदलने की मांग करते हुए कानूनी नोटिस भेजा।
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6 फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद केंद्र सरकार ने नेटफ्लिक्स को आदेश दिया कि वह फिल्म से जुड़ा सारा प्रमोशनल कंटेंट सभी प्लेटफॉर्म से हटा दे। अब देखना यह होगा कि यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है और क्या ‘घूसखोर पंडत’ ओटीटी पर रिलीज हो पाएगी या नहीं।