धर्मेंद्र को क्यों करनी पड़ी बी ग्रेड फिल्में, ढेरों हिट फिल्म के बावजूद क्यों नहीं बन पाए सुपरस्टार?
Dharmendra Untold Story: धर्मेंद्र ने क्यों की बी-ग्रेड फिल्में और क्यों नहीं मिला सुपरस्टार का टैग? मल्टी-स्टारर फिल्मों का प्रभाव, फ्लॉप फिल्मों की अधिक संख्या और वित्तीय ज़रूरतें मुख्य कारण थीं।
- Written By: अनिल सिंह
'ही-मैन' की अनकही कहानी: क्यों करनी पड़ी बी ग्रेड फिल्में और क्यों नहीं मिला सोलो स्टारडम?
Dharmendra Super Star: बॉलीवुड के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र ने अपने छह दशकों लंबे करियर में 300 से अधिक फिल्में दीं और वह हिंदी सिनेमा के सबसे ज्यादा सफल अभिनेताओं में से एक थे। अपने शानदार अभिनय, दमदार एक्शन और सरल व्यक्तित्व के बावजूद, उन्हें कभी राजेश खन्ना या अमिताभ बच्चन की तरह ‘सुपरस्टार’ का आधिकारिक तमगा नहीं मिला। वहीं, 90 के दशक के अंत में उन्हें बी-ग्रेड फिल्मों में भी काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उनके निधन के बाद हर कोई उनके इस जटिल फिल्मी सफर को याद कर रहा है।
धर्मेंद्र को ढेरों हिट्स देने के बावजूद सुपरस्टार का टैग न मिल पाने और करियर के ढलान पर बी-ग्रेड फिल्में करने के पीछे इंडस्ट्री के बदलते समीकरण और उनकी अपनी करियर रणनीति जिम्मेदार थी। यह बताता है कि बॉलीवुड में सिर्फ सफलता ही नहीं, बल्कि ब्रांडिंग और सोलो स्टारडम भी कितना मायने रखता था।
मल्टी-स्टारर फिल्मों का प्रभाव
धर्मेंद्र की कई मेगाहिट फिल्में ‘शोले‘, ‘यादों की बारात’ और ‘सीता और गीता’ या तो मल्टी-स्टारर थीं या उनमें दो हीरो थे। जबकि सुपरस्टार का टैग अक्सर उन अभिनेताओं को मिला जिनकी सोलो हीरो वाली फिल्मों ने रिकॉर्ड तोड़ सफलता हासिल की। अमिताभ बच्चन को ‘एंग्री यंग मैन’ और राजेश खन्ना को ‘रोमांटिक किंग’ जैसी स्पष्ट सोलो इमेज से लाभ मिला, जबकि धर्मेंद्र की छवि ‘ही-मैन’ (एक्शन) और रोमांटिक हीरो के बीच बँटी रही।
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फ्लॉप फिल्मों की अधिक संख्या
धर्मेंद्र ने अपने करियर में बहुत बड़ी संख्या में फिल्में साइन की थीं, जिससे उनकी हिट फिल्मों की संख्या तो बहुत ज्यादा रही, लेकिन इसके साथ ही फ्लॉप फिल्मों की संख्या भी काफी अधिक थी (लगभग 150 फ्लॉप)। यह अधिक संख्या वाली फ्लॉप फिल्मों की दर ही वह बड़ा कारण था, जिसके चलते उन्हें लगातार ‘सुपरस्टार’ नहीं कहा गया। उनकी कम सफलता दर ने उनके समकालीनों को बॉक्स ऑफिस पर उनसे आगे निकलने का मौका दिया।
बी-ग्रेड फिल्मों का वित्तीय दबाव
90 के दशक में, नए सितारों के उदय के कारण धर्मेंद्र को लीड हीरो के ऑफर्स कम मिलने लगे। इसी दौरान उन पर पारिवारिक जिम्मेदारियों और वित्तीय ज़रूरतों का दबाव था। बी-ग्रेड फिल्में (लोहा और जल्लाद नंबर) कम बजट में बनती थीं, जो तुरंत नकद भुगतान करती थीं और गाँव-कस्बों के वफादार दर्शक वर्ग में उनकी बिक्री भी अच्छी होती थी। पैसों की ज़रूरत और कम होते बड़े ऑफर्स ने उन्हें मजबूरी में इन फिल्मों में काम करने के लिए प्रेरित किया।
