दलदल सीरीज रिव्यू: झकझोर देने वाले मर्डर्स, भूमि पेडनेकर का बेखौफ अंदाज, लेकिन कंफ्यूज करती है कहानी
Daldal Web Series Review: भूमि पेडनेकर की वेब सीरीज 'दलदल' प्राइम वीडियो पर रिलीज हो गई है। झकझोर देने वाले मर्डर्स और बेहतरीन एक्टिंग के बावजूद सीरीज की कहानी थोड़ी कंफ्यूजिंग है।
- Written By: अनिल सिंह
Daldal Web Series Review (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Daldal Review: अमृत राज गुप्ता के निर्देशन में बनी डार्क क्राइम-थ्रिलर सीरीज ‘दलदल’ प्राइम वीडियो पर दस्तक दे चुकी है। भूमि पेडनेकर अभिनीत यह सीरीज मुंबई की बारिश और अपराध की काली गलियों के बीच एक ऐसी डीसीपी की कहानी है, जो अपराधियों के साथ-साथ अपने भीतर के अंधेरे से भी लड़ रही है। यह शो अपराध की जांच के साथ-साथ मानवीय मनोविज्ञान की उन परतों को कुरेदता है, जो बचपन के ट्रॉमा से जन्म लेती हैं।
सस्पेंस और खौफनाक मर्डर्स से भरी यह सीरीज दर्शकों को एक अलग दुनिया में ले जाती है, लेकिन क्या यह अपनी जटिल कहानी को सुलझाने में सफल रहती है? आइए जानते हैं।
क्या है ‘दलदल’ की कहानी?
सीरीज की कहानी डीसीपी रीटा फरेरा (भूमि पेडनेकर) के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी की शुरुआत एक सफल रेड से होती है, जहाँ रीटा ह्यूमन ट्रैफिकिंग के जाल से कई लड़कियों को बचाती है। इस कामयाबी के बाद उसे प्रमोशन मिलता है, लेकिन साथ ही हाथ आता है एक खौफनाक सीरियल मर्डर केस। कातिल बड़ी बेरहमी से एक ही पैटर्न पर हत्याएं कर रहा है। रीटा इस जांच में जुटी है, लेकिन वह खुद टॉक्सिक पेरेंटिंग और अतीत के गहरे जख्मों से जूझ रही है। कहानी में जेंडर-बेस्ड क्राइम, वर्कप्लेस सेक्सिज्म और मानसिक स्वास्थ्य जैसे गंभीर मुद्दों को पिरोने की कोशिश की गई है।
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भूमि और समारा की पावर-पैक परफॉर्मेंस
भूमि पेडनेकर ने डीसीपी रीटा फरेरा के रूप में एक बार फिर साबित किया है कि वे इंटेंस किरदारों के लिए ही बनी हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज और आंखों में छिपा दर्द उनके किरदार को जीवंत बनाता है। वहीं, समारा तिजोरी अपनी परफॉर्मेंस से हैरान करती हैं और भूमि को हर फ्रेम में कड़ी टक्कर देती हैं। सीरीज के मर्डर सीन्स इतने वीभत्स और रोंगटे खड़े करने वाले हैं कि कमजोर दिल वाले दर्शकों को अपनी आंखें बंद करनी पड़ सकती हैं। सिनेमैटोग्राफी और डार्क थीम कहानी के मिजाज को बखूबी सपोर्ट करती है।
कमजोर स्टोरीटेलिंग और कंफ्यूजन का शिकार
सीरीज का सबसे कमजोर पक्ष इसकी बिखरी हुई पटकथा है। एक साथ कई मुद्दों (ट्रैफिकिंग, सीरियल किलर, पितृसत्ता) को उठाने के चक्कर में कहानी अपना फोकस खो देती है। रीटा की जिंदगी के फ्लैशबैक और उसके भीतर की हिंसक प्रवृत्तियाँ कई जगह दर्शकों को भ्रमित (Confuse) करती हैं। बीच-बीच में सीरीज की रफ्तार काफी धीमी हो जाती है, जिससे क्लाइमैक्स तक पहुँचते-पहुँचते थकावट महसूस होने लगती है। एक बेहतरीन आइडिया को जिस मजबूत स्टोरीटेलिंग की जरूरत थी, उसकी यहाँ कमी खलती है।
