Badass Ravi Kumar Review: दिमाग घर पर छोड़ के जाओगे तो शायद पसंद आएगी हिमेश रेशमिया की बैडएस रवि कुमार
हिमेश रेशमिया की बैडएस रवि कुमार से दर्शकों को काफी उम्मीद थी। लेकिन फिल्म एंटरटेनमेंट के नाम पर लोगों को टॉर्चर कर रही है। फिल्म देखने वाले दर्शकों का पैसा वसूल होगा या नहीं इसकी गारंटी नहीं है।
- Written By: अनिल सिंह
हिमेश रेशमिया की बैडएस रवि कुमार देख चकराया दर्शकों का दिमाग
- रेटिंग: 2 स्टार्स
- एक्टर्स :हिमेश रेशमिया, प्रभु देवा, कीर्ति कुल्हारी, संजय मिश्रा
- डायरेक्टर : कीथ गोम्स
- जॉनर: हिंदी, एक्शन, कॉमेडी
Badass Ravi Kumar Review in hindi: हिमेश रेशमिया की बैडएस रवि कुमार नाम की फिल्म से दर्शकों को काफी उम्मीदें थी, क्योंकि हिमेश रेशमिया काफी समय से सिल्वर स्क्रीन से दूर थे, लोगों को यह उम्मीद थी कि वह काफी समय के बाद वापस आ रहे हैं तो एक अच्छी फिल्म के साथ दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। लेकिन उनकी यह फिल्म पिछली फिल्म जैसी ही साबित हुई है। इस फिल्म में जबरदस्त एक्शन दिखाया गया है, लेकिन फिल्म की कहानी कमजोर है। किरदारों की भूमिकाएं भी समझ से परे है। फिल्म में एंटरटेनमेंट के नाम पर दर्शकों को बरगलाने बनाने का प्रयास किया गया है।
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कहानी
फिल्म की कहानी 80 के दशक के एक ऐसे पुलिस अफसर रवि कुमार (हिमेश रेशमिया) की कहानी है, जो दबंग पुलिस वाला है। नियम और कानून को ताक पर रखकर भ्रष्टाचार को मिटाने की कोशिश में लगा है। कानूनी नियमों के उल्लंघन की वजह से उसे सस्पेंड कर दिया जाता है। लेकिन उसे एक अनऑफिशियल मिशन के लिए मस्कट भेजा जाता है, वहां से उसे एक संवेदनशील जानकारी भरा कैमरा वापस लाना है। इस काम में उसका सामना सैयद बशीर (मनीष वाधवा), कार्लोस पेड्रो (प्रभु देवा) और लैला (कीर्ति कुल्हारी) से होता है और इसी मिशन के ऊपर यह पूरी फिल्म आधारित है। वो इस मिशन में कामयाब होता है या नहीं इसके लिए आपको फिल्म देखना होगा।
फिल्म में हिमेश रेशमिया की एक्टिंग बिल्कुल वैसी ही है जैसी उनसे उम्मीद की जाती है। उनके एक्टिंग में कोई सुधार देखने को नहीं मिला है। प्रभु देवा ने ठीक-ठाक अंदाज में अपनी भूमिका निभाई है लेकिन वह बेहतरीन विलेन साबित हुए हैं। सनी लियोन, संजय मिश्रा, कीर्ति कुल्हारी, जॉनी लीवर और राजेश शर्मा जैसे कलाकारों ने बेहतरीन अभिनय का परिचय दिया है। लेकिन कहानी कमजोर होने की वजह से उनकी भूमिका समझ से परे हो जाती है।
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फिल्म का म्यूजिक ठीक-ठाक है, लेकिन एक्शन सीन और हर वक्त गोलीबारी एक वक्त में आपको परेशान करने लगेगी। फिल्म में भारी भरकम डायलॉग का इस्तेमाल किया गया है लेकिन एक समय के बाद यह डायलॉग आपको टॉर्चर करने लगेंगे। फिल्म में क्रिएटिव पांच लाइन की कमी महसूस होगी। कई डायलॉग सुनने के बाद ऐसा लगेगा कि इससे बेहतर यह कहा जा सकता था। ऐसे में यह साफ है की फिल्म देखने के बाद आपका पैसा वसूल होगा इस बात की कोई गारंटी नहीं है। लेकिन अगर दिमाग घर पर रख कर जाएंगे तो शायद यह फिल्म आपको पसंद आ सकती है।
