Assembly Elections 2026: बंगाल-तमिलनाडु में बंपर वोटिंग, क्या सत्ता परिवर्तन की ओर हैं बंगाल और तमिलनाडु?
WB & Tamil Nadu Election Voter Turnout: पश्चिम बंगाल के पहले चरण में दोपहर 1 बजे तक 62 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है, जबकि तमिलनाडु में 56 फीसदी वोट पड़े हैं। जनता में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
West Bengal Election Voting Percentage: भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में आज सुबह से ही जिस तरह की चुनावी हलचल देखी जा रही है, वह यह बताने के लिए काफी है कि जनता अपने अधिकारों को लेकर सजग है। चुनाव आयोग द्वारा जारी दोपहर एक बजे तक के आंकड़े राज्य की सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा करने वाले हैं।
पहले चरण में कूच बिहार, दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और जलपाईगुड़ी जैसे उत्तर बंगाल के जिलों के साथ-साथ दक्षिण बंगाल के मुर्शिदाबाद, मिदनापुर और बांकुड़ा जैसे महत्वपूर्ण जिलों में वोट डाले जा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक, हर जगह लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए प्रतिबद्ध नजर आ रहे हैं। इस भारी मतदान ने सभी राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं क्योंकि उच्च मतदान प्रतिशत अक्सर बड़े राजनीतिक बदलाव या मजबूती का संकेत माना जाता है।
बंगाल में बंपर वोटिंग
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में मतदाताओं ने उत्साह के सारे पुराने रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए हैं। राज्य के 16 जिलों की 152 सीटों पर गुरुवार सुबह 7 बजे से ही मतदान की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। दोपहर एक बजे तक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बंगाल में 62.18 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है। सुबह 11 बजे तक यह आंकड़ा 41.11 प्रतिशत था, जो महज दो घंटों में तेजी से ऊपर चढ़ा है।
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तमिलनाडु में रिकार्डतोड़ मतदान
दक्षिण भारत के प्रमुख राज्य तमिलनाडु में भी चुनावी पारा अपने चरम पर है। यहां की सभी 234 विधानसभा सीटों पर आज एक साथ मतदान हो रहा है। दोपहर एक बजे तक तमिलनाडु में 56.81 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने वोट डाल दिए हैं। इससे पहले सुबह 11 बजे तक यहां 37.56 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। राज्य के 5.73 करोड़ से अधिक वोटर इस बार 4,023 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला कर रहे हैं।
तमिलनाडु का यह मुकाबला इस बार काफी दिलचस्प और कड़ा हो गया है क्योंकि मैदान में चार मुख्य खिलाड़ी आमने-सामने हैं। डीएमके के नेतृत्व वाला सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस और एआईएडीएमके के नेतृत्व वाला नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस तो आमने-सामने हैं ही, लेकिन नाम तमिलर काची और तमिलगा वेट्री कजगम ने इस लड़ाई को बहुकोणीय बना दिया है। यही वजह है कि राज्य में हाल के वर्षों का यह सबसे कड़ा चुनावी मुकाबला माना जा रहा है।
उपचुनावों में भी दिखा जनता की ताकत का असर
मुख्य विधानसभा चुनावों के साथ-साथ आज देश के कुछ अन्य हिस्सों में उपचुनावों के लिए भी मतदान की प्रक्रिया जारी है। गुजरात और महाराष्ट्र के चुनावी मैदानों में भी जनता अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। गुजरात के उमरेठ उपचुनाव में दोपहर 1 बजे तक 37.14 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई है। वहीं, महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र माने जाने वाले बारामती उपचुनाव में दोपहर एक बजे तक 31.91 प्रतिशत मत पड़े हैं। महाराष्ट्र के ही राहुरी उपचुनाव में भी मतदान की रफ्तार सामान्य बनी हुई है और वहां दोपहर एक बजे तक 29.67 प्रतिशत मतदान हुआ है। इन उपचुनावों के नतीजे भी स्थानीय स्तर पर सत्ता के संतुलन को तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। हर बूथ पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि मतदान की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का व्यवधान न आए।
चार मई को आने वाले नतीजों पर सबकी नजर
जैसे-जैसे दिन ढल रहा है, मतदान केंद्रों पर भीड़ और बढ़ती जा रही है। पश्चिम बंगाल में चुनाव का दूसरा और अंतिम चरण 29 अप्रैल को होगा, जिसमें बाकी बची 142 सीटों पर जनता अपना फैसला सुनाएगी। चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है कि मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो।
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पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु, दोनों ही राज्यों की जनता ने आज जिस तरह से अपनी ताकत दिखाई है, उसका परिणाम आने वाले समय में देश की राजनीति को नई दिशा दे सकता है। फिलहाल सबकी नजरें 4 मई पर टिकी हैं, जब मतों की गिनती होगी और यह साफ होगा कि बंगाल और तमिलनाडु की जनता ने किस पर भरोसा जताया है। तब तक हर राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरणों को सुलझाने और जीत के दावे करने में व्यस्त रहेगा।
