भाजपा और टीएमसी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Bihar Leaders In Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में यूं तो 294 सीटों पर सियासी मुकाबला अपने चरम पर है लेकिन करीब 50 सीमावर्ती सीटें ऐसी हैं जहां दिलचस्प ‘बिहारी बनाम बिहारी’ मुकाबला देखने को मिल रहा है। बिहार से सटे इन इलाकों में हिंदी भाषी मतदाताओं की अच्छी-खासी संख्या है, जो चुनावी समीकरणों को निर्णायक बना रही है।
यही वजह है कि बीजेपी, टीएमसी और कांग्रेस तीनों दल इन सीटों पर खास रणनीति के तहत बिहार के नेताओं को उतारकर प्रचार में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इन क्षेत्रों में चुनाव प्रचार अब केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह बाहरी प्रभाव और पहचान की राजनीति का केंद्र बन गया है।
बिहार का किशनगंज जिले की सीमा सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल से सटती हैं। साथ ही करीब 50 सीटें इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। इन इलाकों में राजनीतिक दलों की सक्रियता सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग-27 इन दिनों चुनावी गतिविधियों का मुख्य केंद्र बना हुआ है जहां से लगातार नेताओं का आना-जाना लगा हुआ है। सड़क के दोनों ओर बंगाल का इलाका होने के कारण यह मार्ग चुनाव प्रचार का अहम गलियारा बन गया है।
मालदा, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मुर्शिदाबाद और बीरभूम जैसे जिलों में बिहार से आए प्रवासी मतदाताओं का अच्छा खासा प्रभाव है। खासकर पासवान, यादव, कुशवाहा और अति पिछड़ा वर्ग के वोटर यहां चुनावी समीकरण तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। उत्तर दिनाजपुर के इस्लामपुर, चाकुलिया और चोपड़ा जैसे क्षेत्र किशनगंज से सटे होने के कारण राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं।
इन सीटों को जीतने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बिहार के नेताओं की पूरी फौज उतार दी है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन खुद इन इलाकों में लगातार रोड शो और रैलियां कर रहे हैं। उनके साथ उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मंगल पांडेय, दिलीप जायसवाल और रामसूरत राय जैसे नेता भी सक्रिय हैं। बताया जा रहा है कि बीजेपी ने करीब 150 हिंदी भाषी नेताओं को इन 50 सीटों पर प्रचार के लिए लगाया है।
वहीं, टीएमसी भी पीछे नहीं है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपने सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद को प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी है। दोनों नेता बिहारी मूल के होने के साथ-साथ लोकप्रिय भी हैं, जिससे पार्टी को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा तेजस्वी यादव के भी इन इलाकों में प्रचार करने की चर्चा है। कांग्रेस ने किशनगंज सांसद मोहम्मद जावेद को मैदान में उतारा है।
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इस चुनाव की एक दिलचस्प बात यह भी है कि कई नेता व्यक्तिगत और सामाजिक रूप से जुड़े होने के बावजूद राजनीतिक रूप से आमने-सामने हैं। उदाहरण के तौर पर शत्रुघ्न सिन्हा और नितिन नबीन दोनों का संबंध बिहार से रहा है और दोनों कायस्थ समाज से आते हैं लेकिन मौजूदा चुनाव में वह अलग-अलग दलों के लिए प्रचार कर रहे हैं। यह मुकाबला केवल पार्टियों के बीच नहीं बल्कि पहचान और प्रभाव की भी लड़ाई बन गया है, जिससे इन 50 सीटों पर सियासी रोमांच चरम पर पहुंच गया है।