

BJP Foundation Day: दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए आज बेहद खास दिन है, क्योंकि 6 अप्रैल 1980 को इसी दिन इसकी स्थापना हुई थी। शून्य से शुरू हुई यह पार्टी आज देश की राजनीति में प्रमुख स्थान रखती है और केंद्र सहित कई राज्यों में इसकी सरकारें हैं। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि इसकी शुरुआत बेहद साधारण परिस्थितियों में हुई थी।
बीजेपी को समझने के लिए इसकी जड़ों तक जाना जरूरी है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इसकी नींव भारतीय जनसंघ से जुड़ी है, जिसकी स्थापना 1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी। यह संगठन 1977 तक सक्रिय रहा।
1975 में आपातकाल के दौरान, इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ जनसंघ ने अन्य दलों के साथ मिलकर जनता पार्टी बनाई। लेकिन वैचारिक मतभेदों के कारण 1980 में यह गठबंधन टूट गया और इसके बाद बीजेपी का गठन हुआ।
शुरुआती वर्षों में बीजेपी को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 1984 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को सिर्फ 2 सीटें मिलीं, जो उसके लिए बड़ा झटका था। इसके बावजूद अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में पार्टी ने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे अपना विस्तार किया।
1990 का दशक बीजेपी के लिए निर्णायक साबित हुआ। लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में रथ यात्राएं निकाली गईं और राम मंदिर आंदोलन को गति मिली, जिससे पार्टी को व्यापक जनसमर्थन मिला। 1996 में बीजेपी पहली बार केंद्र में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, हालांकि सरकार नहीं बना सकी। 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनी, जो 2004 तक चली।
इस दौरान देश ने कारगिल युद्ध में सफलता हासिल की और परमाणु परीक्षणों के जरिए अपनी ताकत दिखाई। साथ ही, बुनियादी ढांचे जैसे सड़क, पुल और रेलवे में भी तेजी से सुधार हुआ। हालांकि इन उपलब्धियों के बावजूद 2004 में बीजेपी चुनाव हार गई और अगले 10 वर्षों तक सत्ता से बाहर रही। विपक्ष में रहते हुए भी उसने अपनी आवाज बुलंद रखी और संगठन को मजबूत किया।
2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की और पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र में सरकार बनाई। 2019 में भी यह सफलता दोहराई गई। 2024 में बीजेपी ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाई, हालांकि इस बार उसे पूर्ण बहुमत नहीं मिला और सहयोगी दलों के साथ सरकार बनानी पड़ी। इसके बावजूद पार्टी का जनाधार लगातार बढ़ रहा है।
शून्य से शिखर तक का यह सफर सिर्फ एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र का अहम अध्याय भी है, जिसने देश की राजनीति की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित किया है।