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West Bengal Assembly Election 2026 Updates: पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों ‘दलबदल’ की बयार काफी तेज बह रही है। 2026 के विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजने से पहले ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस को बड़े झटके लगे हैं।
कोलकाता के शहरी गलियारों से लेकर उत्तर बंगाल के चाय बागानों तक, नेताओं का दूसरी पार्टियों में शामिल होने का सिलसिला तेज हो गया है। पिछले दो दिन में हुए दो नेताओं के दलबदल ने न केवल राजनीतिक समीकरणों को उलझा दिया है, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि इस बार बंगाल की जंग बेहद दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण होने वाली है। भाजपा अब रणनीतिक रूप से उन चेहरों को अपने पाले में कर रही है, जिनका अपने-अपने क्षेत्रों में गहरा प्रभाव है।
मेखलीगंज से टीएमसी के पूर्व विधायक अर्घ्य रॉय प्रधान ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण करते हुए अपनी पुरानी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार और शुभेंदु अधिकारी की उपस्थिति में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे अब एक ‘भ्रष्ट पार्टी’ के साथ खड़े नहीं रह सकते।
अर्घ्य के पिता अमर रॉय प्रधान कूचबिहार से आठ बार सांसद रहे हैं, ऐसे में उनका पार्टी छोड़ना टीएमसी के लिए एक बड़ा नुकसान माना जा रहा है। उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे अपने क्षेत्र की जनता का सामना करने की स्थिति में नहीं थे, क्योंकि पार्टी की छवि लगातार धूमिल हो रही थी।
अर्घ्य रॉय प्रधान के साथ-साथ प्रमुख राजबंशी नेता बंशी बदन बर्मन ने भी भाजपा का दामन थाम लिया है। उत्तर बंगाल की राजनीति में राजबंशी समुदाय का वोट बैंक अत्यंत निर्णायक माना जाता है और बर्मन इस समुदाय के एक बड़े नेता हैं। उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व के सामने राजबंशी भाषा को मान्यता देने और अपने समुदाय के अधिकारों की रक्षा करने की मांग रखी है।
शुभेंदु अधिकारी ने इस मौके पर कहा कि बर्मन के सुझावों पर अमल कर भाजपा उत्तर बंगाल के विकास के लिए नया ब्लूप्रिंट तैयार करेगी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ‘उत्तर बंगाल’ और ‘राजबंशी वोट बैंक’ पर पकड़ मजबूत करना भाजपा की 2026 की चुनावी रणनीति का सबसे अहम हिस्सा है।
महानगर कोलकाता में भी कांग्रेस को एक बड़ा आघात लगा है, जहां दशकों तक कांग्रेस का चेहरा रहे और वार्ड नंबर 45 के पार्षद संतोष पाठक अब भाजपा में शामिल हो गए हैं। उनके भाजपा में आने से चौरंगी विधानसभा सीट पर सियासी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा उन्हें टीएमसी की नैना बनर्जी के खिलाफ मैदान में उतार सकती है, जिनके खिलाफ उन्होंने 2021 में भी चुनाव लड़ा था।
संतोष पाठक बीजेपी में शामिल हुए
संतोष पाठक ने टीएमसी पर 2021 के चुनावों में प्रशासनिक दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान पुलिस अधिकारियों ने बूथ में घुसकर सत्ताधारी दल के पक्ष में वोट डाले थे।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का दो दिवसीय कोलकाता दौरा इन दलबदलों के बीच काफी अहम माना जा रहा है। वे पार्टी के सांगठनिक ढांचे की समीक्षा करने और आगामी चुनावों के लिए एक ठोस रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से यहां आए हैं। कोलकाता नगर निगम में कांग्रेस के एकमात्र पार्षद रहे संतोष पाठक का भाजपा में जाना यह दर्शाता है कि भाजपा अब शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अपनी पैठ मजबूत कर रही है।
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कुल मिलाकर जिस तरह से दूसरी पार्टियों के नेता एक-एक कर भाजपा का झंडा थाम रहे हैं, वह आगामी चुनावों में सत्ताधारी टीएमसी के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या ये नए चेहरे भाजपा को 2026 में सत्ता की दहलीज तक पहुंचाने में मददगार साबित होते हैं।