बंगाल चुनाव: ममता-सुवेंदु के महामुकाबले से पहले चुनाव आयोग का बड़ा 'प्रहार', क्या बदल जाएगा भवानीपुर का समीकरण?

Bengal Election 2026: बंगाल की राजनीति में चुनावी आहट से दिल्ली से कोलकाता तक सरगर्मी बढ़ गई। ECI ने मतदान से ठीक एक महीने पहले ऐसा फैसला सुनाया है जिसने राज्य के प्रशासनिक गलियारे में हलचल पैदा कर दी।
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प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
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West Bengal Election 2026: एक साथ 73 रिटर्निंग अधिकारियों को उनके पद से हटाना कोई सामान्य प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र, निष्पक्ष और हिंसा-मुक्त चुनाव की दिशा में आयोग का एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। राज्य की 294 सीटों में से लगभग 26 प्रतिशत सीटों पर अब नए चेहरों के हाथ में चुनावी कमान होगी, जो आने वाले समय में चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है।

तबादले की इस गाज की जद में सूबे की सबसे चर्चित सीट 'भवानीपुर' भी आई है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के बीच एक बार फिर कड़ा मुकाबला होने वाला है। आयोग ने जिन 73 अफसरों को हटाया है, उनमें 23 आईएएस अधिकारी हैं और बाकी 50 पश्चिम बंगाल सिविल सेवा से जुड़े हैं। इनमें उत्तर 24 परगना से 13 और दक्षिण 24 परगना से 10 अधिकारियों को स्थानांतरित किया गया है। प्रशासन का मानना है कि रिटर्निंग ऑफिसर ही वह धुरी होता है जो मतदान और मतगणना के दौरान अंतिम निर्णय लेता है, इसलिए इतने बड़े पैमाने पर हुए तबादलों के सियासी मायने बहुत गहरे निकाले जा रहे हैं।

कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचा तबादलों का मामला

जैसे ही आयोग ने तबादलों की सूची जारी की, राज्य सरकार और सत्ताधारी दल ने इसे अपनी संप्रभुता और प्रशासनिक ढांचे पर हमला बताया। यह मामला जल्द ही कलकत्ता हाई कोर्ट की चौखट तक पहुंच गया, जहां एक जनहित याचिका के जरिए इस फैसले को चुनौती दी गई है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान आयोग के वकील ने साफ किया कि हालांकि उनके पास असीमित अधिकार नहीं हैं, लेकिन चुनाव को पारदर्शी बनाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जज सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार को करेगी, जिससे यह तय होगा कि आयोग के ये फैसले कानूनी कसौटी पर कितने खरे उतरते हैं।

आधी रात को वोटर लिस्ट में भी हुआ बड़ा अपडेट

बदलावों का यह सिलसिला केवल अफसरों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि वोटर लिस्ट में भी बड़ा अपडेट आया है। सोमवार की आधी रात को करीब 11:55 बजे चुनाव आयोग ने पहली सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी कर दी। गौरतलब है कि 28 फरवरी को जारी हुई अंतिम लिस्ट में करीब 60 लाख नाम पेंडिंग श्रेणी में रखे गए थे, जिन पर 705 न्यायिक अधिकारियों ने कड़ी जांच की थी। अब उन लाखों लोगों की स्थिति साफ कर दी गई है जिनके वोट देने के अधिकार पर सस्पेंस बना हुआ था। यह पूरी कवायद इसलिए की जा रही है ताकि 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान में किसी भी तरह की धांधली की गुंजाइश न रहे।

24 मार्च तक नई तैनाती पर रिपोर्टिंग का निर्देश

निर्वाचन आयोग ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए सभी 73 अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे 24 मार्च की शाम 5 बजे तक अपने-अपने नए निर्वाचन क्षेत्रों में कार्यभार संभाल लें। इसके तुरंत बाद, 25 मार्च की सुबह से उनका विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया जाना तय हुआ है।

बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए होने वाले इस 'महाकुंभ' में सुरक्षा और निष्पक्षता के लिए 478 केंद्रीय पर्यवेक्षक भी तैनात किए जा रहे हैं। मुख्य सचिव और डीजीपी जैसे शीर्ष पदों पर पहले ही बदलाव किए जा चुके हैं, और अब इन जमीनी स्तर के अधिकारियों का तबादला यह बताता है कि इस बार बंगाल का चुनाव प्रशासन की कड़ी निगरानी में होने वाला है।

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