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Vattiyoorkavu Constituency Profile: केरलम की राजधानी तिरुवनंतपुरम के बीचों-बीच बसा वत्तियूरकावु निर्वाचन क्षेत्र इस बार महज एक चुनावी सीट नहीं, बल्कि शहरी शासन की साख का लिटमस टेस्ट बन गया है। यह इलाका अब पूरी तरह से राजधानी के राजनीतिक रक्तप्रवाह का हिस्सा बन चुका है, जहां के मतदाता अपनी रोजमर्रा की समस्याओं को चुनावी नारों से ऊपर रखते हैं।
वत्तियूरकावु की संकरी गलियां, अपार्टमेंट्स की बढ़ती भीड़ और मानसून के दौरान सड़कों पर भरा पानी किसी भी राजनीतिक विचारधारा से कहीं ज्यादा प्रभावशाली मुद्दे बन चुके हैं। एक जागरूक शहरी मतदाता के लिए अब ‘लॉयल्टी’ स्थायी नहीं रही, बल्कि यह पूरी तरह से विधायक के काम और उसकी उपलब्धता पर निर्भर करती है।
वत्तियूरकावु की राजनीतिक पहचान यहां के भूगोल से तय होती है। जैसे-जैसे तिरुवनंतपुरम का विस्तार हुआ, इस क्षेत्र ने बड़ी संख्या में हाउसिंग कॉलोनियों और कमर्शियल इमारतों को खुद में समेट लिया, लेकिन बुनियादी ढांचा उस रफ्तार से विकसित नहीं हो पाया। आज यहां के लोग ट्रैफिक जाम, पीने के पानी की किल्लत और कचरा प्रबंधन जैसी समस्याओं से सीधे तौर पर जूझ रहे हैं।
यहां का मध्यम वर्ग और सर्विस सेक्टर में काम करने वाला मतदाता अब किसी ‘अमूर्त विचारधारा’ के बजाय इस आधार पर अपना वोट तय करता है कि उसके मोहल्ले की जल निकासी व्यवस्था कितनी दुरुस्त है।
राजनीतिक इतिहास की बात करें तो वत्तियूरकावु पारंपरिक रूप से वामपंथ की ओर झुका रहा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में सीपीआई(एम) के उम्मीदवार वी.के. प्रशांत ने 61,111 वोट हासिल कर अपनी पकड़ साबित की थी। उन्होंने भाजपा के वी.वी. राजेश को 21,515 वोटों के अंतर से हराया था।
हालांकि, भाजपा ने यहां लगातार अपनी ताकत बढ़ाई है और 28.77% वोट शेयर के साथ वह मुख्य चुनौती बनकर उभरी है। इस त्रिकोणीय मुकाबले में कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक गई है, जिससे लड़ाई अब दो ध्रुवों के बीच सिमटती नजर आ रही है।
शहरी क्षेत्र होने के बावजूद वत्तियूरकावु में जातिगत अंकगणित की भूमिका बढ़ती जा रही है। हाल के वर्षों में हिंदू मतदाताओं के बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पैठ मजबूत की है, विशेष रूप से उन वर्गों में जो पहले लेफ्ट या कांग्रेस के समर्थक रहे थे। मध्यम वर्ग और उच्च जाति के पॉकेट्स में भाजपा का बढ़ता प्रभाव लेफ्ट के लिए चिंता का विषय है। मतदाता अब ‘असर्टिव रिप्रजेंटेशन’ यानी दमदार नेतृत्व की तलाश में हैं जो शहर के राजनीतिक पदानुक्रम में उनकी आवाज मजबूती से उठा सके।
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वत्तियूरकावु में वही नेता सफल होता है जो लोगों के बीच हमेशा नजर आता है। यहां का मतदाता किसी ‘पहुंच से बाहर’ रहने वाले प्रतिनिधि को पसंद नहीं करता। आगामी 9 अप्रैल 2026 को होने वाले मतदान के लिए जनता की उम्मीदें स्पष्ट हैं- बेहतर सड़कें, ड्रेनेज और पारदर्शी शासन।