केरल चुनाव: धर्मदम के दंगल में क्या पिनराई विजयन का ‘किला’ भेद पाएगा विपक्ष, या फिर चलेगा मुख्यमंत्री का जादू?
Kerala Assembly Election 2026: केरल की धर्मदम सीट मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का मजबूत गढ़ है। 2026 के चुनावों में यहाँ विकास और सत्ता विरोधी लहर के बीच एक बेहद दिलचस्प मुकाबला होने की उम्मीद है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
फोटो- सोशल मीडिया
Dharmadam Seat Profile: केरल की राजनीति में जब भी सबसे ‘वीआईपी’ सीटों की चर्चा होती है, तो कन्नूर जिले की धर्मदम विधानसभा सीट का नाम सबसे ऊपर आता है। मालाबार तट पर बसी यह सीट महज एक निर्वाचन क्षेत्र नहीं, बल्कि केरल के वामपंथी आंदोलन का सबसे मजबूत स्तंभ मानी जाती है।
राज्य की 140 विधानसभा सीटों में 12वें नंबर पर आने वाली यह सीट इसलिए भी खास है क्योंकि खुद मुख्यमंत्री पिनराई विजयन यहां का प्रतिनिधित्व करते हैं। 2026 के विधानसभा चुनावों की रणभेरी बज चुकी है और सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बार विपक्षी गठबंधन वामपंथ के इस अभेद्य दुर्ग में कोई सेंध लगा पाएगा या विजयन की विकास गाथा एक बार फिर विरोधियों को पस्त कर देगी।
धर्मदम और पिनराई विजयन का अटूट नाता
धर्मदम का सियासी भूगोल और इतिहास दोनों ही कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई(एम) के इर्द-गिर्द बुना गया है। साल 2008 में इस निर्वाचन क्षेत्र के गठन के बाद से ही यहाँ वामपंथ का परचम लहरा रहा है और पार्टी के उम्मीदवारों ने यहां लगातार जीत दर्ज की है। 2016 और 2021 के चुनावों में पिनराई विजयन ने यहां से शानदार जीत हासिल की और राज्य के मुख्यमंत्री बने।
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धर्मदम की सामाजिक बनावट भी काफी विविध है, जिसमें खेती-किसानी करने वाली ग्रामीण आबादी, पेशेवर लोग, सेवा क्षेत्र के कर्मचारी और तटीय इलाकों में रहने वाले मछली पकड़ने वाले समुदाय शामिल हैं। यहां के मतदाताओं की राजनीतिक जागरूकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2021 के चुनाव में यहाँ लगभग 84% मतदान दर्ज किया गया था।
धर्मदम की विकास गाथा का नया अध्याय
विकास के मोर्चे पर धर्मदम ने हाल के वर्षों में एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा पूरे राज्य में हो रही है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के प्रयासों के चलते 2025 में धर्मदम को केरल का पहला ऐसा विधानसभा क्षेत्र घोषित किया गया, जो पूरी तरह से ‘अति-गरीबी’ से मुक्त है। यह उपलब्धि यहां चलाए गए प्रभावी सामाजिक कार्यक्रमों और गरीबी उन्मूलन के लिए किए गए केंद्रित प्रयासों का परिणाम मानी जाती है।
इसके अलावा, यह क्षेत्र पर्यटन के लिहाज से भी काफी समृद्ध है। यहां का ग्रीन आइलैंड और शांत धर्मदम बीच न केवल प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करते हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देते हैं। बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं और तटीय संरक्षण जैसे मुद्दों पर यहां लगातार काम होता रहा है।
2021 के नतीजे और 2026 का रण
अगर पिछले चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें, तो 2021 में पिनराई विजयन ने यहां एकतरफा जीत हासिल की थी। उन्हें कुल 95,522 वोट मिले थे, जो कुल मतदान का लगभग 59.61% था। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार सी. रघुनाथन को 50,123 वोटों के भारी अंतर से हराया था। वहीं, भाजपा के सी.के. पद्मनाभन केवल 14,623 वोट ही हासिल कर पाए थे।
आगामी 2026 के चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने कार्यक्रम जारी कर दिया है, जिसके अनुसार केरल में 9 अप्रैल 2026 को मतदान होगा और 4 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे। धर्मदम में 1.93 लाख से अधिक मतदाता हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या (1,03,712) पुरुषों (89,772) से अधिक है, जो यहाँ की चुनावी दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।
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क्या टूटेगा वामपंथ का यह सबसे मजबूत दुर्ग?
हालांकि धर्मदम को सीपीआई(एम) का सुरक्षित गढ़ माना जाता है, लेकिन विपक्ष इस बार कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। कांग्रेस नीत यूडीएफ के नेताओं का दावा है कि वे इस बार केरल में 100 से अधिक सीटें जीतेंगे और एलडीएफ को 40 से नीचे समेट देंगे। दूसरी तरफ, भाजपा नीत एनडीए भी त्रिशूर और तिरुवनंतपुरम की अपनी हालिया सफलताओं के बाद धर्मदम जैसे क्षेत्रों में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है। विपक्षी दल यहां भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहे हैं।
