सावनेर विधानसभा सीट: क्या कांग्रेस के ‘छत्रप’ को चुनौती दे पीएगी बीजेपी, जानिए अब तक किस का रहा दबदबा?
महाराष्ट्र चुनाव से पहले हम आप तक हर सीट का विश्लेषण लेकर पहुंच रहे हैं। आज बारी है नागपुर जिले और रामटेक संसदीय सीट के अंतर्गत आने वाली सावनेर विधानसभा सीट की। यहां के आंकड़ें जो बयां कर रहे हैं उससे बीजेपी के माथे पर शिकन ज़रूर आ जाएगी। क्योंकि यहां कांग्रेस एक तरह से छत्रप की स्थिति में काबिज है।
- Written By: अभिषेक सिंह
सावनेर विधानसभा सीट (डिजाइन फोटो)
नागपुर: महाराष्ट्र में चुनावी बिगुल बजने वाला है। उम्मीदों के मुताबिक राज्य में हरियाणा के साथ ही चुनाव होने चाहिए थे, लेकिन इस बार त्योहारों के मद्देनजर महाराष्ट्र में चुनाव की तारीखों की घोषणा में देरी की गई है। चुनाव आयोग की तरफ से 1 महीने का एक्सट्रा टाइम पार्टियों के लिए एक्जाम में दिया गया एक्स्ट्रा टाइम के जैसा है। राज्य की सभी 288 सीटों पर पार्टियों और संभावित उम्मीदवारों ने तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।
दूसरी तरफ हम भी आप तक हर सीट का विश्लेषण लेकर पहुंच रहे हैं। आज बारी है नागपुर जिले और रामटेक संसदीय सीट के अंतर्गत आने वाली सावनेर विधानसभा सीट की। यहां के आंकड़ें जो बयां कर रहे हैं उससे बीजेपी के माथे पर शिकन ज़रूर आ जाएगी। क्योंकि यहां कांग्रेस एक तरह से छत्रप की स्थिति में काबिज है। यहां तक कि कांग्रेस की तरफ से जो यहां लगातार बीजेपी या विरोधी दलों के लिए चुनौती बना हुआ है उसका नाम भी सुनील छत्रपाल है।
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कैसा रहा सावनेर का इतिहास?
सावनेर सीट पर साल 1978 से लेकर 1990 तक आयोजित चार चुनावों में लगातार कांग्रेस ने जीत दर्ज की। पहली बार कांग्रेस को 1995 के चुनाव में सुनील छत्रपाल ने ही निर्दलीय मैदान में उतरकर कांग्रेस के अश्वमेध के अश्व को लगाम लगाई। लेकिन उसके बाद 1999 मे यहां बीजेपी ने कब्जा जमा लिया। 2004 में एक बार सुनील छत्रपाल ने निर्दलीय मोर्चा संभालते हुए जीत दर्ज की। हालांकि बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। जिसके बाद 2009, 2014 और 2019 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की है।
कब किसे मिली सावनेर में विजयश्री?
- 2019 सुनील छत्रपाल केदार, कांग्रेस
- 2014 सुनील छत्रपाल केदार, कांग्रेस
- 2009 सुनील छत्रपाल केदार, कांग्रेस
- 2004 सुनील छत्रपाल केदार, निर्दलीय
- 1999 देवराव विट्ठलराव आसोले, बीजेपी
- 1995 सुनील छत्रपाल केदार, निर्दलीय
- 1990 रंजीत अरविंदबाबू देशमुख, कांग्रेस
- 1985 रंजीत अरविंदबाबू देशमुख, कांग्रेस
- 1980 रामजी चिमन नाईक, कांग्रेस (आई)
- 1978 रामजी चिमन नाईक, कांग्रेस(आई)
सावनेर के जातीय समीकरण
2019 चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो 304816 मतदाताओं वाली इस सीट पर करीब साढे 53 हजार दलित यानी एससी वोटर्स है। इसके अलावा यहां 28 हजार के करीब आदिवासी वोटर्स भी किसी भी उम्मीदवार की जीत-हार में अमह भागीदारी निभाते हैं। बात करें मुस्लिम मतदाताओं की तो उनकी संख्या यहां करीब साढ़े 11 के आस-पास है। सावनेर में ग्रामीण और शहरी मतदाताओं का रेशियो करीब 60-40 फीसदी का है। इसलिए यहां चुनाव में राज्यस्तरीय मुद्दे हावी दिखाई देते हैं।
अबकी बार, किसे मिलेगा जीत का उपहार?
1978 से लेकर अब तक के चुनावी के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां कांग्रेस का एक छत्र राज चला आ रहा है। यहां पर दो बार निर्दलीय उम्मीदवार ने बाजी मारी हैं। जो कि अब लगातार कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज कर रहा है। इसके अलावा सावनेर के चुनावी इतिहास में केवल एक बार ही कमल खिल सका है। इस लिहाज से यहां एक बार फिर से कांग्रेस ही हावी दिखाई दे रही है। इस बार अगर कुछ उलटफेर नहीं होता यहा टिकट वितरण में कोई बदलाव नहीं होता है तो कांग्रेस की जीत ही पक्की दिखाई दे रही है।
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