तीस्ता विवाद से लेकर घुसपैठ तक, बंगाल में ‘कमल’ खिलते ही ढाका में हलचल; दहशत में क्यों पड़ोसी देश?
Bangladesh Reaction On West Bengal Election: कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य मुजाहिदुल इस्लाम सलीम का कहना है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत के साथ एक सांप्रदायिक ताकत सत्ता में आई है और यह सच है।
- Written By: मनोज आर्या
तारिक रहमान और पीएम मोदी, (डिजाइन फोटो- नवभारत)
How Bangladesh Looks BJP Victroy In West Bengal: पश्चिम बंगाल में डेढ़ दशक बाद ममता बनर्जी के सत्ता से बाहर होने और राज्य में पहली बार बीजेपी की सरकार बनने से बांग्लादेश में भी उथल-पुथल की स्थिति बनी हुई है। तीस्ता नदी के पानी बंटवारे, सीमा से जुड़े मद्दों और ‘पुश-इन या पुश बैक’ जैसे द्विपक्षीय सवालों पर अब राज्य सरकार की क्या भूमिका होगी, इसको लेकर भी पड़ोसी देश में की पार्टियों में चर्चा, चिंता और जिज्ञासा है। केंद्र सरकार अक्सर ये आरोप लगाता रहा है कि कुछ लोग अवैध रूप से बांग्लादेश से भारत में घुसपैठ करते हैं।
बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के कुछ नेताओं के बयानों को लेकर बांग्लादेश में चिंता जताई गई थी। बांग्लादेश के कई लोगों ने आशंका जताई थी की भारतीय नागरिकों को बांग्लादेशी बताकर बांग्लादेश भेजने की कोशिश हो सकती है।
‘भारत-बांग्लादेश के रिश्ते पर कोई असर नहीं’
बांग्लादेश के राजनीतिक दलों ने कहा था कि चुनाव से पहले बीजेपी के कुछ नेताओं ने बांग्लादेश को लेकर ऐसे बयान दिए, जो दोनों देशों के संबंध के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। वहीं, बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में कोई भी सरकार बने, इससे भारत-बांग्लादेश के रिश्तों पर किसी भी तरह का असर नहीं होगा। गौरतलब है कि अगस्त 2024 में बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद दोनों देशों के बीच काफी तनावपूर्ण स्थिति हो गई थी, जो अब तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। बांग्लादेश में हुए तख्तापलट के बाद से ही वहां की कुछ राजनीतिक पार्टियों का यह आरोप है कि भारत उनके देश की अंदरूनी राजनीति पर प्रभाव डालने की कोशिश करता रहा है।
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(पश्चिम बंगाल चुनाव पर बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद का बयान)
नई सरकार के बाद दोनों देशों के संबंधों में सुधार
बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान अल्पसंख्यक हिंदुओं की हत्या, भारत में बांग्लादेश मिशन पर हमले, भारतीय प्रोडक्ट्स के बहिष्कार की मांग, ढाका में भारतीय दूतावास के सांस्कृतिक केंद्र पर हमले, वीजा सेवाओं में रोक, व्यापारिक सुविधाओं में कटौती और भारत में टी-20 वर्ल्ड कप क्रिकेट खेलने से बांग्लादेश क्रिकेट टीम के इनकार करने जैसी घटनाओं ने दोनों देशों के रिश्तों को निचले स्तर तक पहुंचा दिया था। हालांकि, बांग्लादेश में फरवरी में हुए आम चुनाव के बाद दोनों देशों ने संबंध सुधारने की कोशिशें शुरू की हैं। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान दिल्ली का दौरा भी कर चुके हैं।
भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी विवाद
दौरे से पहले, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने पत्रकारों से कहा कि यह बांग्लादेश और भारत के बीच एक नया संबंध है। इससे पहले शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंध बेहतर माने जाते थे, लेकिन इस दौरान तीस्ता नदी के जल बंटवारे का मुद्दा सुलझ नहीं पाया था। ममता बनर्जी लगातार इसका विरोध करती आई हैं। तीस्ता नदी के जल बंटवारे का मुद्दा भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से चला आ रहा एक अहम विवाद है।
तीस्ता नदी की तस्वीर, (सोर्स- सोशल मीडिया)
बीजेपी नेताओं के बयान पर NCP की चिंता
नेशनल सिटिजन्स पार्टी (NCP) के प्रवक्ता आसिफ महमूद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले बांग्लादेश को लेकर दिए गए बीजेपी नेताओं के कुछ बयान चिंताजनक थे और इनका असर यहां (बांग्लादेश में) भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले वहां के कुछ नेताओं ने अलग-अलग समय पर बांग्लादेश और यहां के लोगों के बारे में चिंताजनक टिप्पणियां की हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। हमारी पश्चिम बंगाल के साथ लंबी सीमा है और संबंधों का स्तर बहुआयामी है। ऐसे में अगर इस तरह की टिप्पणियां सामने आती रहती हैं, तो इसका असर इस देश में भी पड़ सकता है।
‘सांप्रदायिकता की राजनीति हमारी चिंता’
जमात-ए-इस्लामी के महासचिव मिया गोलाम परवर का कहना है कि पश्चिम बंगाल चुनाव का बांग्लादेश की राजनीति पर असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, उन्होंने ये कहा कि उनका हिंदुत्व और सांप्रदायिकता की राजनीति हमारी चिंता का बड़ा कारण है। वे अपने राज्य के धर्मनिरपेक्षता के आदर्श का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्हें मुसलमानों पर अत्याचार बिल्कुल भी दिखाई नहीं दे रहा है। अगर भारत धर्मनिरपेक्ष होता, तो अन्य धर्मों के लोग सुरक्षित होते।
शेख हसीना का मदद कर रही BJP सरकार
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अवामी लीग ने भारतीय राज्य और सरकार की मदद से ताकत हासिल की थी और शेख हसीना उनके संरक्षण में हैं। बीजेपी सरकार उनकी मदद कर रही है। अब वे और अधिक संरक्षण पाकर अपनी साजिश बढ़ा सकती हैं। उन्होंने आगे कहा कि करीबी पड़ोसी होने के नाते दोनों देशों के संबंध बहुत महत्वपूर्ण हैं। हम मानते हैं कि जो भी सत्ता में हो, दोनों देशों के संबंध आगे बढ़ेंगे और इससे लोगों को फायदा होगा। दोनों देश निश्चित रूप से आपसी सहयोग के आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाएंगे।
पीएम मोदी के साथ बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना, (सोर्स- सोशल मीडिया)
बंगाल की सत्ता में सांप्रदायिक ताकत की एंट्री
कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य मुजाहिदुल इस्लाम सलीम का कहना है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत के साथ एक सांप्रदायिक ताकत सत्ता में आई है और यह भी सच है कि बांग्लादेश में भी ऐसी ही एक सांप्रदायिक ताकत मौजूद है। उन्होंने कहा कि हालांकि मेरा मानना है कि दोनों देशों के आम लोग लोकतंत्र और गैर-सांप्रदायिकता के आधार पर समाज को आगे बढ़ाएंगे।
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इस बीच, बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा कि पश्चिम बंगाल की राज्य सरकार में चाहे जो भी सत्ता में हो, बांग्लादेश लंबित मुद्दों को हल करने के लिए उसी दृष्टिकोण के साथ काम करेगा और बातचीत के जरिए समाधान की कोशिश करेगा।
