कोर्ट के फैसले और समय का चक्र, चुनाव आयोग की अनियमितताओं पर आनंद दुबे ने उठाए बुनियादी सवाल
Election Commission Allegations: शिवसेना (UBT) प्रवक्ता आनंद दुबे ने हरियाणा, बंगाल और महाराष्ट्र में चुनाव आयोग के खिलाफ लगे आरोपों पर बयान दिया। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर सतर्क किया।
- Written By: गोरक्ष पोफली
आनंद दुबे (साेर्स: सोशल मीडिया)
Anand Dubey Statement: देश के विभिन्न राज्यों में हाल ही में संपन्न हुए चुनावों और आगामी चुनावी तैयारियों के बीच शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने निर्वाचन आयोग (Election Commission) की भूमिका पर गंभीर सवालिया निशान लगाए हैं। मुंबई में मीडिया से बात करते हुए दुबे ने कहा कि केवल एक राज्य नहीं, बल्कि हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्यों से चुनाव आयोग के खिलाफ अनियमितताओं की शिकायतें आ रही हैं।
संस्थानों पर बढ़ते आरोप और कानूनी चुनौतियां
आनंद दुबे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब भी चुनाव परिणामों या प्रक्रिया में गड़बड़ी की बात आती है, तो मामला अंततः अदालत की चौखट पर पहुंचता है। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली देरी पर चुटकी लेते हुए कहा, हम आरोप लगाते रहते हैं, लेकिन मामला जब कोर्ट जाता है, तो आप जानते ही हैं कि फैसला आने में कितना समय लग सकता है। फैसला तब आता है जब शायद उसकी प्रासंगिकता ही खत्म हो जाए।
Mumbai, Maharashtra: Shiv Sena (UBT) spokesperson Anand Dubey says, “There have been many allegations against the Election Commission. Allegations have been made in Haryana, Maharashtra, Bihar, and West Bengal. But even if we keep making allegations, the matter eventually goes to… pic.twitter.com/P8q2WVdpaU — IANS (@ians_india) May 5, 2026
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मतदाता सूची में गड़बड़ी पर कड़ा रुख
शिवसेना (UBT) प्रवक्ता ने मतदाता सूचियों में किए जा रहे बदलावों और नामों को हटाए जाने की प्रक्रिया (जैसे SIR प्रक्रिया) पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत नागरिक का वोट है। दुबे ने कहा, यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता हो रही है या किसी का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाया जा रहा है, तो यह कतई नहीं होना चाहिए। यह लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करने जैसा है।
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विपक्ष की मांग और भविष्य की राह
आनंद दुबे का यह बयान उस समय आया है जब विपक्षी दल एकजुट होकर चुनाव आयोग से अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवैधानिक संस्थाओं को किसी भी दबाव से मुक्त होकर काम करना चाहिए ताकि जनता का भरोसा बना रहे। चुनावी प्रक्रिया में शुचिता और मतदाता के अधिकारों की रक्षा करना आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिसमें किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
