क्या भारत पूर्व पीएम Sheikh Hasina को वापस बांग्लादेश भेजेगा? प्रत्यर्पण अनुरोध पर हो रहा विचार

Sheikh Hasina Extradition: भारत ने बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना के प्रत्यर्पण अनुरोध पर विचार करना शुरू कर दिया है। इसे बड़ा कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है, हालांकि अंतिम फैसला अभी बाकी है।
Sheikh Hasina Extradition: Will India Send Former PM Back to Bangladesh?
बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Sheikh Hasina Extradition To Dhaka Bangladesh Politics: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना अगस्त 2024 से भारत में शरण लेकर रह रही हैं। उनके देश छोड़ने के बाद से ही भारत और बांग्लादेश के बीच राजनीतिक रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। अब ढाका की अदालत से सजा के बाद उन्हें वापस भेजने की मांग लगातार काफी तेज हो रही है। भारत ने शेख हसीना का ढाका प्रत्यर्पण की समीक्षा करने की बात मानकर एक बड़ा कदम उठाया है।

लंबे समय तक इस मुद्दे पर खामोश रहने के बाद दिल्ली का यह रुख बड़े बदलाव का संकेत है। विशेषज्ञ इसे दोनों पड़ोसी देशों के बीच फिर से बेहतर संबंध बनाने की एक बड़ी कोशिश मान रहे हैं। हालांकि इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि भारत तुरंत उन्हें वापस उनके देश भेजने वाला है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बड़े कूटनीतिक फैसले पर बहुत ही बारीकी के साथ टिकी हुई हैं।

लचीलेपन का संकेत

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार भारत का यह कदम कूटनीतिक लचीलेपन का एक बड़ा संकेत है। पहले भारत इस पूरे मामले में सीधे तौर पर टालमटोल वाला बहुत ही सख्त रवैया अपना रहा था। अब इस प्रत्यर्पण अनुरोध की समीक्षा करने का फैसला दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की उम्मीद जगाता है।

कानूनी या राजनीतिक

विशेषज्ञ अभिनव मेहरोत्रा कहते हैं कि प्रत्यर्पण की समीक्षा करना अभी केवल एक सामान्य प्रक्रियात्मक भाषा है। सरकारें अक्सर बिना कोई पक्का वादा किए अपने खुलेपन की भावना दिखाने के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल करती हैं। वहीं शोधकर्ता अमित रंजन इसे कानूनी नहीं बल्कि पूरी तरह से एक बड़ा और महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा मानते हैं।

द्विपक्षीय बातचीत जरूरी

इस गंभीर और बड़े राजनीतिक मुद्दे को केवल द्विपक्षीय बातचीत के जरिए ही पूरी तरह से सुलझाया जा सकता है। भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह सभी मौजूदा राजनीतिक विवादों को राजनीतिक तरीके से ही हल करना चाहता है। दोनों देशों के बीच बेहतर तालमेल के लिए इस संवेदनशील मामले पर शांतिपूर्ण चर्चा होना बहुत ज्यादा जरूरी है।

क्या है पूरी प्रक्रिया

अगर प्रत्यर्पण की यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो बांग्लादेश 1962 अधिनियम के तहत अपना औपचारिक अनुरोध भेजेगा। इस औपचारिक अनुरोध की समीक्षा के बाद दिल्ली की एक अदालत इस मामले की गंभीरता से पूरी जांच करेगी। इसके बाद पूर्व पीएम शेख हसीना भी अदालत में इस पूरे अनुरोध को कानूनी तौर पर चुनौती दे सकती हैं।

भारत के लिए अहमियत

विशेषज्ञ शांति मैरिएट डिसूजा का मानना है कि हसीना भारत के लिए एक बहुत ही बड़ी रणनीतिक संपत्ति हैं। भारत का लंबा लक्ष्य अवामी लीग पार्टी को भविष्य में फिर से राजनीतिक तौर पर बहुत मजबूत करना था। हसीना को तुरंत वापस ढाका सौंपने का सीधा मतलब वहां अवामी लीग का पूरी तरह से खात्मा होना होगा।

अवामी लीग का आधार

शेख हसीना साल 1981 से ही अवामी लीग की अध्यक्ष पद की अहम जिम्मेदारी सफलतापूर्वक संभाल रही हैं। उन्होंने 2009 से 2024 तक देश में लगातार शासन किया और उनका वहां एक बहुत ही बड़ा जनाधार है। बांग्लादेश की बीएनपी सरकार के भारत-विरोधी रुख अपनाने के समय वह दिल्ली के लिए बहुत ही अहम होंगी।

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