बंगाल में नए CM की शपथ ग्रहण में फंसेगा पेच! ममता बनर्जी का इस्तीफे से इनकार, अब क्या करेंगे राज्यपाल?
Mamata Banerjee Resignation: बंगाल में मिली हार के बाद ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि बीजेपी ने 100 सीटों की चोरी की है। उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई बीजेपी से नहीं बल्कि चुनाव आयोग से थी।
- Written By: मनोज आर्या
टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Mamata Banerjee Refuses to Resign: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार, 4 मई को सामने आ चुके हैं। जहां, भारतीय जनता पार्टी प्रचंड बहुमत के साथ 15 साल से सत्ता में काबिज टीएमसी सरकार को उखाड़ फेंकने में सफल रही। बंगाल में टीएमसी की करारी हार के बाद आज मंगलवार, 5 मई को ममता बनर्जी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। इस दौरान उन्होंने ऐलान किया कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी।
बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मिली हार के बाद ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि बीजेपी ने 100 सीटों की चोरी की है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि लड़ाई बीजेपी से नहीं बल्कि चुनाव आयोग से थी। उन्होंने आगे कहा कि मैं हारी नहीं हूं, ऐसे में मैं इस्तीफा भी नहीं दूंगी। ममता बनर्जी ने ये भी कहा कि काउंटिंग सेंटर पर उनके साथ उनके साथ मारपीट हुई।
ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने पर सवाल
अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर कोई मुख्यमंत्री चुनाव हारने के बाद ऐसा कैसे कर सकता है। अगर ममता बनर्जी अपना इस्तीफा नहीं देते हैं तो आगे नए सीएम का चुनाव कैसे होगा। अगर ऐसा होता है तो इसकों लेकर क्या नियम है, राज्यपाल क्या कर सकते हैं? आइए उन सभी कानूनी विकल्पों को विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं।
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अगर ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं दे तो क्या?
भारतीय संविधान के भाग 6 में अनुच्छेद 153 से 167 तक राज्यपाल से संबंधित प्रावधान हैं, जिसमें मुख्य रूप से अनुच्छेद 154 (कार्यपालिका शक्ति) और अनुच्छेद 161-200 (क्षमादान, विधायी शक्तियां) में उनकी शक्तियों का वर्णन है। अगर कोई मुख्यमंत्री चुनाव हारने के बाद भी इस्तीफा देने से मना करता है, तो ऐसे में राज्यपाल के पास विशेष कानूनी शक्तियां होती हैं। गवर्नर पहले मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांग सकते हैं और इनकार करने की स्थिति में वो तुरंत मौजूदा विधानसभा को भंग करने का आदेश जारी कर सकते हैं। ऐसे स्थिति में राज्यपाल मुख्यमंत्री को बर्खास्त कर सकते हैं।
#WATCH | कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, “मैं इस्तीफ़ा नहीं दूँगी, मैं हारी नहीं, मैं राजभवन नहीं जाऊँगी… सवाल ही नहीं उठता। नहीं। अब, मैं यह भी कहना चाहती हूँ कि हम चुनाव नहीं हारे। यह हमें हराने की उनकी कोशिश है। आधिकारिक तौर पर, चुनाव आयोग के ज़रिए,… pic.twitter.com/9JcZW8o9oP — ANI_HindiNews (@AHindinews) May 5, 2026
राज्यपाल के पास और क्या विकल्प है?
इसके अलावा अगर मुख्यमंत्री की ओर से कोई कदम उठाया जाता है या फिर कोई बड़ी संकट खड़ा होता है तो ऐसे में राज्यपाल अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू करने का सिफारिश कर सकते हैं। किसी भी राज्य में संवैधानिक मशीनरी की विफलता के मामले में ऐसा होता है। हालांकि, बंगाल में मामला कुछ अलग है। यहां चुनाव के बाद नतीजे जारी हो चुके हैं और यह भी साफ हो चुका है कि राज्य में किसकी सरकारा बनेगी।
अनुच्छेद 164 के तहत राज्यपाल के पास शक्ति
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत राज्यपाल के पास राज्य में नया मुख्यमंत्री नियुक्त करने और उसे शपथ दिलवाने का विशेष अधिकार होता है। चुनाव में हारने वाली सरकार और सीएम की बर्खास्तगी के बाद राज्यपाल विधायक दल के नेता को मुख्यमंत्री को चुन सकते हैं, जिसके बाद नई सरकार बन सकती है। अगर बंगाल की स्थिति के बारे में बात करें तो, भले ही ममता बनर्जी इस्तीफा न दे, लेकिन वो जनादेश के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री नहीं रह सकती हैं।
कब खत्म हो रहा है बंगाल विधानसभा का कार्यकाल?
पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को खत्म हो रहा है। ऐसे में नए मुख्यमंत्री और सरकार के गठन में ज्यादा संवैधानिक रुकावट नहीं आने वाली है। 8 मई तक खुद ही विधानसभा को भंग माना जाएगा और नई सरकार का गठन जरूरी होगा। ममता बनर्जी के सीएम पद से इस्तीफा देने या नहीं देने का फिर कोई खास मतलब नहीं रह जाएगा।
क्या पहले भी कोई CM कर चुके हैं इस्तीफे से इनकार?
ममता बनर्जी से पहले साल 1997 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव भी इस्तीफे से इनकार कर चुके हैं। जब चारा घोटाले के आरोप में लालू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ, तो उन पर इस्तीफे का बहुत प्रेशर था। हालांकि, शुरू में उन्होंने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में उन्हें पद छोड़नी पड़ी थी। इसके बाद लालू यादव ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री के रूप में मनोनीत किया।
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2024 में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के दौरान झारखंड में भी ऐसी स्थिति बनी थी, जहां हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री पद पर बने रहने या इस्तीफा देने के समय को लेकर काफी राजनीतिक गहमागहमी हुई थी।
