अर्जुन राम मेघवाल (Image- Social Media)
Mamata Banerjee Speech: बीजेपी(BJP) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके सहयोगियों पर भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाया है। पार्टी ने चुनाव आयोग के सामने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि राज्य में “अराजकता और भय” का माहौल बनाया जा रहा है और निष्पक्ष व भयमुक्त मतदान सुनिश्चित करने के लिए सख्त कार्रवाई जरूरी है।
बीजेपी ने चुनाव आयोग से मांग की है कि केंद्रीय पुलिस बलों के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों पर प्राथमिकी दर्ज की जाए और ममता बनर्जी पर अस्थायी रूप से चुनाव प्रचार करने पर रोक लगाई जाए। साथ ही, राज्य में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की भी अपील की गई है।
पार्टी(BJP) के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार और अर्जुन राम मेघवाल की मौजूदगी में आयोग को ज्ञापन सौंपा। इसमें आरोप लगाया गया कि तृणमूल कांग्रेस के नेता संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने और चुनाव ड्यूटी पर तैनात केंद्रीय बलों का मनोबल गिराने के लिए भड़काऊ बयान दे रहे हैं।
वीरेंद्र कुमार ने कहा कि चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में भय और आतंक का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने की कोशिश हो रही है। उनके अनुसार, जब शीर्ष नेतृत्व इस तरह के बयान देता है कि केंद्रीय बलों का विरोध घरेलू सामान से किया जाए, तो यह बेहद चिंताजनक है।
बीजेपी(BJP) नेताओं ने यह भी दावा किया कि चुनाव जीतने के लिए हिंसक तरीकों की बात करने वाले बयान मतदाताओं के बीच डर का माहौल पैदा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ टिप्पणियां लोगों को किसी भी हद तक जाने के लिए उकसाती हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरनाक है।
पार्टी ने अपने ज्ञापन में यह भी कहा कि 7 अप्रैल की एक रैली में ममता बनर्जी ने केंद्रीय बलों को लेकर कथित तौर पर भड़काऊ टिप्पणी की थी, जिसे बीजेपी ने “बेहद गंभीर” बताया। वहीं, 3 अप्रैल को दक्षिण दिनाजपुर में दिए गए एक अन्य बयान को लेकर भी पार्टी ने आपत्ति जताई है, जिसमें केंद्रीय बलों पर आरोप लगाए गए थे।
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बीजेपी(BJP) ने इन बयानों को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि इससे समूहों के बीच तनाव बढ़ सकता है और चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। पार्टी ने चुनाव आयोग से अपील की है कि ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि मतदाता बिना किसी डर या दबाव के अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें।