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West Bengal Assembly Election 2026: भवानीपुर की गलियों में कदम रखते ही आपको कोलकाता की उस सुनहरी विरासत का अहसास होता है, जहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस से लेकर सत्यजीत राय जैसी महान विभूतियों की यादें बसी हैं। लेकिन आज इन्हीं ऐतिहासिक गलियों में पुरानी इमारतों की खामोशी के बीच एक नई चुनावी सुगबुगाहट तेज हो गई है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का राजनीतिक भाग्य इसी मिट्टी से जुड़ा है, जहां 2011 से तृणमूल कांग्रेस अजेय रही है। इस बार का चुनाव केवल सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के अपने ही घर में उनके वजूद की परीक्षा जैसा नजर आ रहा है।
इन दिनों भवानीपुर के मतदाताओं के बीच सबसे बड़ी चिंता का विषय निर्वाचन आयोग की नई लिस्ट है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, राज्य भर में लगभग 90 लाख नामों को सूची से बाहर किए जाने की बात सामने आई है, जिसने एक ‘ब्यूरोक्रेटिक तनाव’ की स्थिति पैदा कर दी है। भवानीपुर जैसे हाई-प्रोफाइल इलाके में भी हजारों मतदाता इस बात को लेकर संशय में हैं कि क्या वे आने वाली 29 अप्रैल को वोट डाल पाएंगे।
यह प्रशासनिक प्रक्रिया अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है, जिससे करीब 60 लाख लोग कानूनी अधर में लटके हुए महसूस कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने खुद भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे मतदाताओं के अधिकारों पर हमला बताया है।
बीजेपी ने इस बार भवानीपुर में ममता बनर्जी को घेरने के लिए एक विशेष ‘चक्रव्यूह’ तैयार किया है। पार्टी की रणनीति यह है कि मुख्यमंत्री को उनके अपने ही क्षेत्र में इतना उलझा दिया जाए कि वे राज्य के अन्य हिस्सों में प्रचार के लिए समय न निकाल सकें। इसके लिए बीजेपी ने विधानसभा में विपक्ष के नेता शुवेंदु अधिकारी को कोलकाता की इस अहम सीट पर सक्रिय कर दिया है।
हालांकि, इतिहास गवाह है कि जब भी ममता बनर्जी खुद मैदान में होती हैं, यहां के मतदाता उन पर अटूट विश्वास जताते हैं। 2021 के उपचुनाव में उन्होंने 58,835 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की थी, जो उनकी लोकप्रियता का बड़ा प्रमाण है।
भवानीपुर की राजनीति में एक बहुत ही अजीब और दुर्लभ चलन देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ वर्षों में यहां पंजीकृत मतदाताओं की संख्या में लगातार गिरावट आई है। जहां 2011 में 2.12 लाख से ज्यादा वोटर थे, वहीं 2024 तक यह संख्या घटकर करीब 2.05 लाख रह गई है।
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इसका एक बड़ा कारण यह माना जा रहा है कि दक्षिण कोलकाता का यह इलाका बेहद महंगा और अभिजात वर्ग का है, जिस वजह से कई पुराने परिवार यहां से हटकर शहर के अन्य सस्ते इलाकों में बस रहे हैं। भवानीपुर में मुस्लिम समुदाय की आबादी लगभग 21.80 प्रतिशत है, जो चुनाव परिणामों को प्रभावित करने में निर्णायक भूमिका निभाती है।