
दिल्ली स्थित बाउली मस्जिद। इमेज-सोशल मीडिया
Delhi News: दिल्ली की मस्जिद और दरगाह फैज इलाही के अहाते में हुई बुलडोजर कार्रवाई पर विवाद थमा नहीं था कि अब एक और मस्जिद का मामला खड़ा हो गया। मामले में कोर्ट द्वारा बाउली मस्जिद के आसपास अतिक्रमण के मामले में जांच के आदेश जारी किए गए हैं। अदालत ने कहा है कि शिकायत की जांच के बाद कानून के तहत कार्रवाई की जाए।
डिफेंस कॉलोनी में मौजूद बाउली मस्जिद और उसके आसपास से अवैध कब्जे हटाने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर दिल्ली हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया। अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि पहले शिकायत की पूरी जांच होनी चाहिए। उसके बाद कानून के तहत जरूरी कदम उठाए जाएं। बता दें, यह याचिका भी उसी सेव इंडिया फाउंडेशन ने दायर की थी, जिसकी याचिका पर पहले दरगाह फैज इलाही के अहाते में बुलडोजर कार्रवाई की गई थी। यानी दोनों मामलों में याचिकाकर्ता संस्था एक ही है। पहले मामले में कार्रवाई हो चुकी है। अब दूसरे मामले में अदालत ने सीधे कार्रवाई का आदेश देने के बजाय जांच पर जोर दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली वक्फ बोर्ड के वकील भी अदालत में मौजूद थे। वैसे, जब मामले में वक्फ बोर्ड के एक वकील से बाद में संपर्क किया गया तो उनकी ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका। वक्फ बोर्ड द्वारा मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। याचिका में कहा गया है कि 25 नवंबर 2025 को इस संबंध में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) समेत कई अधिकारियों को शिकायत दी गई थी। इसके बावजूद अब तक कब्जा हटाने के लिए ठोस या प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। याचिका में बताया गया कि शिकायत दिए जाने के बाद काफी समय बीत चुका है, लेकिन प्रशासन द्वारा स्पष्ट कार्रवाई नहीं की गई।
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याचिका में अदालत से मांग की गई थी कि STF को निर्देश दिया जाए कि वह इस शिकायत पर तुरंत कार्रवाई कर अतिक्रमण हटाए। याचिकाकर्ता का कहना था कि जब शिकायत पहले दी जा चुकी है तो उस पर देरी करना सही नहीं है। याचिका में कहा गया कि जिस जमीन पर कब्जे का मामला है, वह डिफेंस कॉलोनी के दो शैक्षणिक संस्थानों के बीच है। इस इलाके में अवैध कब्जे से स्थानीय लोगों और छात्रों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं। याचिका के मुताबिक रास्तों और आसपास के क्षेत्र में अतिक्रमण होने से आवाजाही में परेशानी होती है। आसपास रहने वाले लोगों के साथ छात्रों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अदालत ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि पहले शिकायत की जांच की जाए और जांच के बाद कानून के तहत जरूरी कदम उठाए जाएं। अदालत ने किसी तरह की सीधी कार्रवाई का आदेश नहीं दिया, बल्कि जांच को तरजीह दी है। माना जा रहा कि अदालत के आदेश के बाद नगर निगम या संबंधित कॉरपोरेशन अदालत के निर्देश के मुताबिक उस स्थान का निरीक्षण करेगा, जहां अतिक्रमण बताया गया है। निरीक्षण के बाद कार्रवाई कानून के मुताबिक की जाएगी, जैसा कि अदालत ने अपने आदेश में कहा है।






