
रेखा गुप्ता शपथ लेती हुईं (फोटो- सोशल मीडिया)
नई दिल्लीः नई दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) की पूर्व अध्यक्ष और पहली बार विधायक निर्वाचित रेखा गुप्ता गुरुवार को दिल्ली की नौवीं मुख्यमंत्री बन गईं। राजधानी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित एक भव्य समारोह में दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। उन्होंने हिंदी में, ईश्वर के नाम पर शपथ ली।
रेखा गुप्ता के बाद प्रवेश वर्मा, आशीष सूद, मनजिंदर सिंह सिरसा, कपिल मिश्रा, रविंद्र इंद्राज और पंकज कुमार सिंह ने नयी मंत्रिपरिषद के सदस्य के रूप में शपथ ली। इसके साथ ही दिल्ली में 27 साल बाद भाजपा की सत्ता में वापसी हो गई।
पीएम मोदी सहित ये लोग शपथ के बने साक्षी
इस भव्य शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। इनके अलावा चंद्रबाबू नायडू, देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे, अजीत पवार और पवन कल्याण सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी इस समारोह के साक्षी बने। हालाकि इस समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी इस शपथ ग्रहण समारोह में नहीं पहुंचे हैं।
सीएम नीतीश, सीएम योगी और सीएम धामी नहीं आए
बता दें कि उत्तर प्रदेश से डिप्टी सीएम केशव मौर्य व डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे है। यूपी विधानसभा में आज बजट पेश हो रहा है, इसलिए सीएम योगी नहीं आए हैं। इसके पुष्कर सिंह धामी भी बजट की वजह से नहीं आ पाए हैं। वहीं नीतीश कुमार के न आने की वजह स्पष्ट नहीं है। हालांकि उनकी पार्टी से ललन सिंह समारोह में शामिल हुए हैं।
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दिल्ली की 8वीं सीएम हैं रेखा गुप्ता
रामलीला मैदान में कई गणमान्य हस्तियां और बड़ी संख्या में आम लोग भी उपस्थित थे। भाजपा विधायक दल की बैठक में बुधवार को 50 वर्षीय रेखा गुप्ता को आठवीं दिल्ली विधानसभा में सदन का नेता चुना गया। दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने बुधवार देर शाम राज निवास में रेखा गुप्ता द्वारा सरकार बनाने का दावा पेश किए जाने के बाद उन्हें नयी सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में से 48 सीट पर कब्जा कर जीत हासिल की और आम आदमी पार्टी (आप) के एक दशक लंबे शासन का अंत किया था। दिल्ली विधानसभा के लिए पांच फरवरी को चुनाव हुए थे और मतगणना आठ फरवरी को हुई थी।






