Supreme Court Slams NTA: NEET-UG विवाद पर SC की फटकार के बाद देशभर में सियासत तेज हो गई है। JDU सांसद संजय झा इस मामले में केंद्र सरकार का बचाव करते दिखे। उन्होंने सरकार द्वारा उठाए गए कदम को सराहा।
जदयू सांसद संजय झा (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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JDU MP Sanjay Jha On NEET UG 2026 controversy: NTA द्वारा आयोजित परीक्षा में गड़बड़ी पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद देशभर में राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। इस बीच एनडीए की अहम सहयोगी दल जदयू के सांसद संजय झा ने एक बड़ा बयान दिया है। सरकार का बचाव करते हुए जदयू सांसद ने विपक्ष द्वारा सरकार पर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। इस घटना को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण माना है।
जो कुछ भी हुआ, बेहद दुर्भाग्यपूर्ण: जदयू
सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले पर NTA को फटकार लगाए जाने के बाद JD(U) सांसद संजय कुमार झा ने मीडिया से बातचीत के दौरान लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो कुछ भी हुआ, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। 22 लाख बच्चे, उनके माता-पिता और वे जिन्होंने परीक्षा दिया है, परीक्षा देने के बाद किसी भी परिवार के लिए यह बहुत दुखद है। यह सही नहीं है।
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Patna, Bihar: On the Supreme Court has pulled up the NTA over the issue, JD(U) MP Sanjay Kumar Jha says, “What happened is very unfortunate. 22 lakh children, their parents, and those who give exams—after giving the exam… For any family, this is very sad; it is not right. But I… pic.twitter.com/39RbhoZWor— IANS (@ians_india) May 30, 2026
छात्रों और उनके अभिभावकों के प्रति संवेदना व्यक्त करने के बाद उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा की उठाए गए कदमों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि जिस तरह से जब यह मामला संज्ञान में आया। सरकार ने तुरंत पहल की और पूरी परीक्षा रद्द कर दी।
सरकार ने कुछ भी छिपाने या मामले पर पर्दा डालने की कोशिश नहीं की। उसने निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए परीक्षा रद्द कर दी, जिससे कि किसी भी बच्चे को नुकसान न हो।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
बता दें, नीट-यूजी 2026 परीक्षा को पर चल रहे विवाद को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई थी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि PM मोदी खुद पूरे मामले नजर बनाए हुए हैं। इस दौरान कोर्ट ने NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ संस्थागत नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जवाबदेही भी तय होनी चाहिए, जिससे कि पता चल सके कि कौन अधिकारी किस काम के लिए जिम्मेदार है।
इस दौरान कोर्ट ने NTA को UPSC जैसी संस्थाओं से सीख लेने की भी सलाह दी और कहा कि छात्रों और उनके परिवारों के सालों के सपनों और संघर्ष के साथ इस तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने शिक्षा मंत्रालय को मामले पर जुलाई तक एक विस्तृत हलफनामा दाखिल का निर्देश दिया।
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